मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउपदेश ५६
॥ शब्द ११ ॥
है हजूर नहिं दूर, हमा-जा भर पूर ।
ज़ाहिरा जहान, जा का ज़हूर पुर नूर ॥ १ ॥
बेसबूह बेनमून, बेवगून ओस्त ।
हमा ओस्त हमा अज़ोस्त, जान-जानाँ दोस्त ॥ २ ॥
शबो रोज़ ज़िकर, फ़िकरही में मशग़ूल ।
तेही दरगाह बीच, पड़े हैं क़बूल ॥ ३ ॥
साहेब है मेरा पीर, क़ुदरत क्या कहिये ।
कहता मलूक बंदा, तक पनाह रहिये ॥ ४ ॥
॥ शब्द १२ ॥
राम कहो राम कहो राम कहो बावरे ।
अवसर न चूक भोंदू, पायो भला दाँव रे ॥ १ ॥
जिन तो को तन दीन्हो, ता को न भजन कीन्हो ।
जनम सिरानो जात, लोहे कैसो ताव रे ॥ २ ॥
रामजी को गाय गाय, रामजी को रिझाव रे ।
रामजी के चरन कमल, चित्त माहिं लाव रे ॥ ३ ॥
कहत मलूकदास, छोड़ दे तैं झूठी आस ।
आनँद मगन होइ के, हरि गुन गाव रे ॥ ४ ॥
॥ शब्द १३ ॥
रस रे निर्गुन राग से, गावै कोइ जाग्रत जोगी ।
अलग रहै संसार से, सो (इस) रस का भोगी ॥ १ ॥
भरम करम सब छाँड़, अनूठा यह मत पूरा ।
सहजै धुन लागी रहै, बाजै अनहद तूरा ॥ २ ॥
लहरैं उठतीं ज्ञान की, बरसै रिमझिम मोती ।
गगन गुफा में बैठ के, देखै जगमग जोती ॥ ३ ॥
सिव नगरी आसन किया, सुन ध्यान लगाया ।
तीनों दसा बिसार के, चौथा पद पाया ॥ ४ ॥