सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 45 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 25

१६ मलूकदासजी की बानी
जोई मन सोई परमेसुर, कोइ बिरला अबधू जानै ।
जौन जोगीसुर सब घट ब्यापक, सो यह रूप बखानै ॥ २ ॥
सबद अनाहद होत जहाँ तें, तहाँ ब्रह्म कर बासा ।
गगन मँडल में करत कलोलै, परम जोति परगासा ॥ ३ ॥
कहत मलूका निरगुन के गुन, कोइ बड़भागी गावै ।
क्या गिरही औ क्या बैरागी, जेहि हेरि देयँ सो पावै ॥ ४ ॥
॥ शब्द ५ ॥
किरपा कर गुरु जुगत बताई । आपा खोजो भरम नसाई ॥१॥
आपा खोजे त्रिभुवन सूझै । गुरु परताप काल से जूझै ॥२॥
सबद ब्रह्म का करै बिचार । सोई चलै जियत होइ छार ॥३॥
संतन की सेवा चित लावै । पाहन पूजि न मन भरमावै॥४॥
कामिनि कनक कलह का भंडा। इन ठगनिन सारा जग डंडा॥५॥
होत न हँसै मरत ना रोवै । ता को रंड कबहुँ न बिगोवै॥६॥
परम तत्त जो दृढ़ कर रहै । माया मोह में कबहुँ न बहै ॥७॥
गुरु के बचन करै परतीत । सोई सिद्ध जाय जग जीत ॥८॥
सत संतोष हिये में राखै । सो जन नाम रसायन चाखै ॥६॥
काटे कटै न जारे जरै । अर्ध नाम भजन करि तरै ॥१०॥
न्यारे होयँ पिता और माई । अगिनि बुझै सीतल होइ जाई॥११॥
मनुवाँ मारि करै नौ खंड । कबहुँ न सहै देंह का दंड ॥१२॥
गुरु गोबिंद सार मत दीन्ह । भला भया जो आतम चीन्ह ॥१३॥
बड़े भाग से आतम जागा । कहत मलूक सकल भ्रम भागा ॥१४॥
॥ शब्द ६ ॥
आपा मेटि न हरि भजे, तेई नर डूबे ।
हरि का मर्म न पाइया, कारन कर ऊबे ॥ १ ॥
करें भरोसा पुत्र का, साहेब बिसराया ।
बूड़ गये तरबोर१ को, कहुँ खोज न पाया ॥ २ ॥
(१) अथाह ।