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सर्वकोश
मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

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पृष्ठ 23

१४ मलूकदासजी की बानी
थोथे बाँट बाँधि के भोंदू, येहि बिधि जाव न पारा ।
ऋद्धि सिद्धि में बूड़ि मरोगे, पकड़ो खेवनहारा ॥ ३ ॥
अगल बगल का पैंडा पकड़ा, दिन दिन चढ़ता भारा ।
कहत मलूक सुनो रे भोंदू, अबिगत मूल बिसारा ॥ ४ ॥
॥ शब्द १० ॥
नाम हमारा खाक है, हम खाकी बंदे ।
खाकहिं ते पैदा किये, अति गाफिल गंदे ॥ १ ॥
कबहुँ न करते बन्दगी, दुनिया में भूले ।
आसमान को ताकते, घोड़े चढ़ि फूले ॥ २ ॥
जोरू लड़के खुस किये, साहेब बिसराया ।
राह नेकी की छोड़ि के, बुरा अमल कमाया ॥ ३ ॥
हरदम तिस को याद कर, जिन वजूद संवारा ।
सबै खाक दर खाक है, कुछ समझ गँवारा ॥ ४ ॥
हाथी घोड़े खाक के, खाक खानखानी १।
कहैं मलूक रहि जायगा, औसाफ निसानी ॥ ५ ॥
॥ उपदेश ॥
॥ शब्द १ ॥
अब तो अजपा जपु मन मेरे ॥ टेक ॥
सुर नर असुर टहलुवा जा के, मुनि गंधर्ब जा के चेरे ॥१॥
दस औतार देखि मत भूलो, ऐसे रूप घनेरे ॥२॥
अलख पुरुप के हाथ बिकाने, जब तें नैन निहारे ॥३॥
अबिगत अगम अगोचर अबधू, संग फिरत हैं तेरे ॥४॥
कह मलूक तू चेत अवेता, काल न आवै नेरे ॥५॥
(१) बादशायत ।