मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचेतावनी १३
॥ शब्द ७ ॥
मुवा सकल जग देखिया, मैं तो जियत न देखा कोय हो॥टेक॥
मुवा मुई को व्याहता रे, मुवा ब्याह करि देय ।
मुए बराते जात हैं, एक मुवा बधाई लेय हो ॥ १ ॥
मुवा मुए से लड़न को, मुवा जोर लै जाय ।
मुरदे मुरदे लड़ि मरे, एक मुरदा मन पछिताय हो ॥ २ ॥
अंत एक दिन मरौगे रे, गलि गुलि जैहै चाम ।
ऐसी झूठी देह तैं, काहैं लेव न साँचा नाम हो ॥ ३ ॥
मरने मरना भाँति है रे, जो मरि जानै कोय ।
राम दुआरे जो मरै, फिर बहुरि न मरना होय हो ॥ ४ ॥
इनकी यह गति जानिके, मैं जहँ तहँ फिरौं उदास ।
अजर अमर प्रभु पाइया, कहत मलूकादास हो ॥ ५ ॥
॥ शब्द ८ ॥
सोते सोते जन्म गँवाया ।
माया मोह में सानि पड़ो सो, राम नाम नहिं पाया ॥ १ ॥
मीठी नींद सोये सुख अपने, कबहूँ नहिं अलसाने ।
गाफिल होके महल में सोये, फिर पाछे पछिताने ॥ २ ॥
अजहूँ उठो कहाँ तुम बैठे, बिनती सुनो हमारी ।
चहूँ ओर मैं आहट पाया, बहुत भई भुइँ भारी ॥ ३ ॥
बंदीछोर रहत घट भीतर, खबर न काहू पाई ।
कहत मलूक राम के पहरा, जागो मेरे भाई ॥ ४ ॥
॥ शब्द ९ ॥
अवधू याही करो बिचार ।
दस औतार कहाँ तैं आये, किन रे गढ़े करतार ॥ १ ॥
केहि उपदेस भये तुम जोगी, केहि बिधि आतम जारा ।
केहि कारन तुम काया सताई, केहि बिधि आतम मारा ॥ २ ॥