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सर्वकोश
काव्यालङ्कार (आचार्य भामह - भारतीय काव्यशास्त्र एवं अलङ्कार-सिद्धान्त मूल महाग्रन्थ सटीक)

काव्यालङ्कार (आचार्य भामह - भारतीय काव्यशास्त्र एवं अलङ्कार-सिद्धान्त मूल महाग्रन्थ सटीक)

Kavyalankara of Acharya Bhamaha with Commentary

आचार्य भामह (सम्पादक: पण्डित देवेन्द्रनाथ शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished230 पृष्ठ

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पृष्ठ 218

QUOTATIONS 189
8. Jayamaṅgala in Bhaṭṭikāvyaṭīkā—
सर्गः श्लोकः भामहे सर्गः श्लोकः भामहे
10 1 II—5 & 17 10 58 III—21
23 II—27 59 III—23
26 II—21 60 III—31
30 II—30 61 III—35
36 II—71 62 III—27
38 II—68 63 III—33
40 II—75 64 III—35
41 II—77 65 III—37
42 II—79 66 III—39
43 II—81 67 III—41
44 II—89 68 III—43
45 II—91 69 III—45
46 II—93 & 87 70 III—47
48 III—6 71 III—49
50 III—8 72 III—55
53 III—12 [17 12 1 III—53 & 54.
55 III—14, 15,
9. Keśavamiśra in Alaṁkāraśekhara
क्वचिदग्रे प्रसरता क्वचिदापत्य निघ्नता ।
शुनेव सारङ्गकुलं त्वया भिन्नं द्विषां बलम् ॥ II—54.
रसवद्दर्शितस्पष्टशृङ्गारादिरसोदयम् । III—6.
10. Mallinātha in Bhaṭṭikāvyaṭīkā—
भट्टिः XI—1. भामहः II—3.
,, XII—1. ,, III—53 & 54.