सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
करणकुतूहलम् (भास्कराचार्य द्वितीय - सुमेध हिन्दी व्याख्या सहित पञ्चाङ्ग एवं ग्रह-गणित)

करणकुतूहलम् (भास्कराचार्य द्वितीय - सुमेध हिन्दी व्याख्या सहित पञ्चाङ्ग एवं ग्रह-गणित)

Karanakutuhalam of Bhaskaracharya with Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (टीकाकार: पं. रामचन्द्र पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished155 पृष्ठ

पृष्ठ 59, कुल 155 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 59

बाहुभागास्तिथ्युद्धृता" or "बाहुभागास्तिथ्युद्धृता"?
It is "बाहुभागास्तिथ्युद्धृता".

L12:
"ना कलादिः शरो भवति त्रिभिर्विभक्तेऽङ्गुलादिः स्यात् ।"
Wait, look at "त्रिभिर्विभक्तेऽङ्गुलादिः" or "त्रिभिर्विभक्ते ऽङ्गुलादिः"?
"त्रिभिर्विभक्तेऽङ्गुलादिः स्यात् ।"

L13:
"अथ सपाताचन्द्रः ६ । १ । ५२ । २३ भुजः ० । १ ।"
Wait: "सपाताचन्द्रः" or "सपातचन्द्रः"?
Look at 'त': there is an aa-matra? "सपाता" or "सपात"?
Look at 'त': it has a vertical bar, looks like "सपाताचन्द्रः" or "सपातचन्द्रः"?
Wait, look at the space between त and च: there is a vertical stroke 'ा'!
Wait, let's look at: स (sa) पा (pa) त (ta) ा (aa) च (ca) न्द्रः (ndrah)?
No, wait: could it be "सपातचन्द्रः"? Look at 'ता': the line is connected. Wait, is it सपातचन्द्रः or सपाताचन्द्रः?
Actually