कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३४ ) बीजक कबीरदास ।
साखी ॥ बाप पूतकी ऐकैनारी, औ एकै माय विआय ॥
ऐसा पूत सपूत न देखों, जोबापैचीन्हैंधाय ॥ ६ ॥
बापता धोखाब्रह्महै जाते शुद्धजीवअशुद्धहैउत्पन्नभयेहैं ते अशुद्ध जीव पूतहैं
सो दोऊमाया सबलित भये ताते बाप पूतकीएकै नारी भई । औ पूर्व जगत् का-
रण रूपा जो माया है तौनेहींते(अहंब्रह्म(स्मि)मान्योहै औ तौनेहींते व्यष्टि जीवनकी
उत्पत्तिहूभई है याते दोहुनकी एकै महतारी है।याते एकै माया बियानी है।सो ऐसा
पूत सपूत नहीं देखेहु है कौनसो बाप जोहै ब्रह्म ताको धायकै कहे बहुत बुद्धि
दौरायकैं चीन्हैं कि, यह धोखा है । अब जाकी शक्ति करिकै यह जगत् भयोहै
जौनी भांतिते सो समेटि कै सिंहावलोकन कैकै पुनि कहैहैं ॥ ६ ॥
इति प्रथम रमैनी समाप्तम् ।
अथ दूसरी रमैनी ॥२॥१॥
चौपाई ।
अंतर ज्योति शब्द यक नारी।हरि ब्रह्मा ताके त्रिपुरारी॥१॥
तेतिरियैभगलिंगअनंता । तेउनजानैआदिउअंता ॥ २ ॥
बाखरीएकविधातैकीन्हा । चौदहठहरपाटिसो लीन्हा॥ ३ ॥
हरिहरब्रह्ममहंतौनाऊ । तेपुनितीनिवसावलगाऊ ॥ ४ ॥
तेपुनिरचिनिखंडब्रह्मांडा । छादर्शनछानवेपखंडा ॥ ५ ॥
पेटहिकाहूनवेदपढ़ाया। सुन्नतिकरायतुरु कनाहिं आया ॥ ६ ॥
नारीमोचित गर्भप्रसूती । स्वांगधरै बहुतै करतूती ॥ ७ ॥
तहियाहमतुमएकैलोहू । एकैप्राणबियायलमोहू ॥ ८ ॥
एकैजनी जनासंसारा । कौनज्ञानते भयो निनारा ॥ ९ ॥
भावालकभगद्वारेआया । भगभोगेतेपुरुष कहाया ॥ १०॥