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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 86

रमैनी । ( ३५ )
अविगतिकीगतिकाहुनजानी।एकजीभकितकहौंबखानी १ १
जोमुखहोइजीभदशलाषा।तौकोइआयमहंतौभाषा ॥१२॥
साखी ॥ कहहिंकबीर पुकारिकै, ई लेऊ व्यवहार ॥
एक रामनाम जानेविना, भव बूडि मुवा संसार॥१३॥
अंतर ज्योति शब्द यक नारी।हरि ब्रह्मा ताके त्रिपुरारी॥१॥
अन्तरज्योति कहे वह ज्योतिके अन्तरकेभीतरै नारी जोहै गायत्रीरूपबा-
णी सो शब्द जो है राम नाम ताको लैकै प्रगट भईहै सो मङ्गलमें कहि आ-
येहैं। तौने शब्दकी शक्तिते तानारीके हरि ब्रह्मा त्रिपुरारी भये हैं। अर्थात्
रामनामको जगत् मुख अर्थ लै कै वहै बाणी रूप नारी वेद शास्त्र औ सब सं-
सार प्रगटकियो रामनाममें ये सब भरेंहैं सो मैं अपने मंत्रार्थमें लिख्यो है
सो राम नाममें जो साहब मुख अर्थहै ताको छिपाय दियो ॥ १ ॥
तेतिरियैभगलिंगअनंता । तेउनजानैआदिउअंता ॥ २ ॥
तौन जो है तिरिया ताते अनंत भग लिंग होत भये अर्थात् बहुत स्त्री पुरुष
भये ते अनेक शास्त्रनमें अनेक वेदनमें बिचार करत २ थके तबहूं वह राम
नामके अर्थको अन्त न पाये ॥ २ ॥
वखरीएकविधातैंकीन्हा । चौदहठहरपाटिसोलीन्हा ॥३॥
एक बखरी यह ब्रह्मांड ब्रह्मा बनावत भये सो चौदह ठहर कहे चौदह
भुवन करिकै पाटि लेते भये ॥ ३ ॥
हरिहरब्रह्ममहंतौनाऊ । तेपुनितीनिबसावलगाऊ ॥ ४ ॥
औ हरि हर ब्रह्मा जौन ब्रह्मांड प्रथम ब्रह्मा बनायो है वोही ब्रह्माण्ड में
तीनि गांव बसावत भये तहांके मालिक होत भये औ जे प्रथम ब्रह्मादिक देव-
ता भये हैं तेई ब्रह्मादिकनके अंगनके देवता होतभये । सो मङ्गलमें लिखि-
आयेहैं ब्रह्मादिकनकी उत्पत्ति औपुनि भगवान्की नाभीमें कमल भयो तेहिते
ब्रह्माभयेहैं तिनते उत्पत्ति भई है औ ब्रह्मवैवर्त्तमें प्रथम ब्रह्माकी उत्पत्ति प्रकृति