कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबघेलवंशवर्णन । ( ७११ )
सुवरण वृष्टि पै न कीनी कोऊ आजु तक जैसे करे वारि वृष्टि भादौं मेघ खासी है॥
भूप विश्वनाथको अनूप तनय रघुराज जैसी जातरूप वृष्टि कीनी पुरी काशी है १
घर घर वाट वाट गंगाजूके घाट घाट हाट हाट भाटहीं सों भाषैं जन राशी है॥
पंडित अखंडित की कीनीसभा मंडित ना ऐसी कोऊ भूपति उदंडित विकाशी है॥
कहैं युगलेश रहि गयो ना कलेशलेश याचक अशेषको विदेश देश वासी है ॥
हम तुला भासी महाराज रघुराज यशी खासी कीर्ति अतुला प्रकाशी पुरी काशी है२
भूपर घनेरे एक एकते बडेरे भूप भये हैं अनूप पै न ऐसी कोऊ कीनी है ॥
जैसी करी महाराज विश्वनाथ तनय यह महाराज रघुराज मोद उर भीनी है ॥
काशीपुरी असी गंग संगम निकट तट चढ़िकै हिरण्य तुला पुण्यकै अक्षीनी है॥
कहे युगलेश देश देशके नरेशनकी जाईवो महेशपुरी राह रोकि दीनीहै ॥ ३ ॥
केते भूमिपाल भये भारी राज्यवारे भूमि केतको दिवान बड़े दानी सत्यसिन्धुहैं ॥
आय आय काशीपुरी लाय लाय द्रव्य भूरी दै कै विप्र वृन्दनको पोष्यो पंगु अंधुहै॥
पैन ऐसो भयो जोन हेम रौप्य तुला चढ़ि दान अतुलाकै छावै सुयश सुगन्धुहै ॥
राजा रघुराज राजै की तो या जमाने मध्य की देवान ताको श्रीदिवान दीनबंधुहै४॥
कुंडलिया-सुवरण वृष्टि करी उतै, काशी नृप रघुराज ॥
तेहि प्रभाव तिहिं देशघन बरसे वारिदराज ॥
बरसे वारिदराज सकलमें भयो सुभिक्षै ॥
रह्यो न लेश कलेशवेश मिटिगो दुर्भिक्ष ॥
भिक्षै माँगत रहे रंक जे घर घर कुवरन ॥
तेऊ पाय अनाज भूरि द्वैगे तनु सुवरन ॥ १ ॥
दोहा-महाराज रघुराजको, दृढ़ विश्वास य :
तेहि प्रभाव सुखसाज सज,सुकर दराजहु काज ॥१८४॥
कवित्त ।
जोधपुर महाराज राज्यहै दराज जाहि राज काज ऐशही में बीत दिनरैन है ॥
साहिबी सुरेशसी धनेश ऐसी मौज समै तेजमें दिनेश वेश विलसति शैनहै॥
मैनकीसी मूरति मनोहर तखतसिंह बखत बुलन्द निरखत करै चनहै ॥
जाके उर ऐने युगलेशकहूं लेस भैन देखे बनै नैन वैन कहत बनैनहै ॥ १ ॥