कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 700, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ें( ६७० ) बघेलवंशवर्णन ।
तुमहीं राजा अहौ हमोरें । निशि दिन सेवन करब तिहारे ॥
भये खुशी केहरीसिंह सुनि । करि नवाबको अति खातिर पुनि ॥
भवन जानकी दई बिदाई । गयो सो बार बार शिरनाई ॥
नृप केहरीसिंह सहुलासा । कछु वासर तहँ कियो निवासा ॥
सरदारनको करि सन्माना । सब चकरनको सहित विधाना ॥
दिय चिट्ठा चाकरी चुकाई । वसे सबै सेवा मनलाई ॥
दोहा--तहँ केहरी सिंहके, माल केसरी पूत ॥
होत भयो जाके वदन, वसी सरस्वता पूत ॥३७॥
उभय मल्लको जोर तनु, सुंदर तेज विधान ॥
कछु दिनमें तेहि व्याहकरि दीन्ह्यो दान महान ३८॥
फेरि व्यतीत भये कछुकाला । तनु तजि करि केहरी भुवाला ॥
वास कियो वासवपुर मांही । मालकेसरी सपदि तहांही ॥
विधि युत मृतकक्रिया पितुकेरो । करि दीन्ह्यो तहँ दान घनेरो ॥
मालकेसरी कछु दिन माहीं । उपजायो सुंदर सुत काहीं ॥
सारंग देव नाम तेहि भयऊ । सुयश प्रताप नाम तेहि ठयउ ॥
भीमलदेव भयो सुत तासू । फैलि रह्यो जगमें यश जासू ॥
हरिगुरुको भो भक्त महाना । पाल्यो परजन प्राण समाना ॥
ब्रह्मदेव ताके सुत जायो । सो निज पितुसों वचन सुनायो ॥
दोहा--आप कीजिये भजन हरि, सुचित भौन करि वास ॥
मोहिं दीजिये फौज सब, करि उर कृपा प्रकाश ॥३९॥
कछु दिन सैर करौं महि माहीं । प्रकटहुँ नाम रावरे काहीं ॥
सुनि नृप भीमलदेव उदारा । ब्रह्मसूनु सों वचन उचारा ॥
मनमें यह विचार किय नीको । करै सुपूती सोइ सुत ठीको ॥
जगमें नहिं कपूत कहवायो । अस करतूति करन मन लायों ॥
ब्रह्मदेव सुनि ये पितु वैना । करी तयारी भरि अतिचैना ॥
चतुरंगिनी चमू सँग लैके । कियो पयान वीररस ह्वैकै ॥
राज्य गहरवारनके आये । कछु वासर तहँ वसि सुख छाये ॥
पुनि सिधाय शिरनेतन देशू । तहँ विवाह किय ब्रह्म नरेशू ॥