सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 701, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 701

बघेलावंशवर्णन । ( ६७१ )
दोहा-कछुक दिवस शिरनेतनृप, सेवा करि युत प्रीति ॥
ब्रह्मदेव सों समय गुणि, कह्यो विनयकी रीति ॥ ४० ॥
यक मम भाई देश हमारे । गनत न हमहिं भये बलवारे ॥
तिनको दंड दीजिये नाथा । तौ हम बसैं राज्य सुख साथा ॥
ब्रह्मदेव यह सुनि तेहिं वानी । कह नर पठैलेहिं हम जानी ॥
पुनि नृप ब्रह्मदेव रिस छायो । पाती यक ऐसी लिखवायो ॥
ग्यारहसै नेजा सँग लीन्हे । आवत तुब दरशन मन दीन्हे ॥
हैं बघेल हम विदित जहाना । तुम शिरनेत अनुज बलवाना ॥
यह हवाल लिखि पत्री काहीं । दै पठयो यक मनुज तहाँहीं ॥
सो पाती दियँ तिन कर जाई । बांचत गयो कोपमें छाई ॥
दोहा-तुरत जवाब लिखायकै, दीन्ह्यो तेहिं कर धारि ॥
आप दरश पावैं जो हम, धनि धनि भाग्य हमारि ॥ ४१ ॥
सुन्यों न हम बघेलको नामा । निरखि होहिं अब पूरण कामा ॥
पाती असि लिखाय शिरनेता । बांध्यो युद्ध करनको नेता ॥
फौज जोरि आगे कछु जाई । ठाढ़े भये रोष अति छाई ॥
इततें ब्रह्मदेवकी सैना । काल समान गई कछु मैना ॥
भगी फौज शिरनेतन केरी । नृप शिरनेत बन्धु तहँ घेरी ॥
पकरि भूप शिरनेतहिं काहीं । सौंप्यो सो अतिहीं सुख माहीं ॥
ब्रह्मदेवको निज सब देशू । सौंपिदियो शिरनेत नरेशू ॥
तहँ नृप ब्रह्मदेव सहुलासा । करत भये कछु वासर वासा ॥
दोहा-ब्रह्मदेवके होतभयो, तनय सिंह जेहिं नाम
सिंहदेवके पुनि भये, वेणीसिंह ललाम ॥ ४२ ॥
भूपति वेणीसिंहके, नरहरिसिंह सुजान ॥
नरहरि हरिके होतभे, भैददेव मतिवान ॥ ४३ ॥
शिरनेतनके सहित उछाहा । भैददेवको कियो विवाहा ॥
भैददेवकों परम प्रतापा । बाढ़्यो रिपुन देत अति तापा ॥
भैददेव पुनि पितु ढिग जाई । सादर विनती कियो सुहाई ॥