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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 685

साखी । ( ६४९ )
मतिबिंब बीजकमें दिखायो अर्थात् यह बतायदियो कि, रामनामहीते जगत
मुख अर्थ में सबकी उत्पत्ति भई है । औ रामनामही साहबको बतावै है
साहब मुख अर्थमें । औ अनिर्वचनीय साहबको रामनामही देखाय देइहै यह
भी कबीरजी अलखके देखिबेको उपाय बताय दियो यही अलखको लखावनो
है सो जब साहब को ह्वैजाय तब या लखै तामें प्रमाण सुखसागरको ॥ “अ-
लख अपार लखै केहि भांती । अलखलखै अलखैकी जाती ॥ ३४१ ॥
बूझौ करता आपना, मानौ बचन हमार ॥
पंचतत्त्वके भीतरै, जिसका यह बिस्तार ॥ ३४२ ॥
तुम कहांते आये औ तुमको को कियों सो अपने कर्त्ताको तुम बूझौ वह
साखी में तो बचन हम कहि आये ताको तुम मानौ तुम वह शब्द रामनामही
ते भये हौ जिसका यह बिस्तार सब देखतेहौ औ जौन जौन मानिदी तुम
मानिराखेहौ सो सब पंचतत्त्वकेभीतरहै एकवह रामनामही पंचतत्त्वके बाहिर है
औ वही तुम्हारो आदि कर्त्ता है ॥ ३४२ ॥
हमकर्त्ताहैं सकल सृष्टिकै, हम पर दूसर नाहि ॥
कहै कबीर हमैं नहिं चीन्है,सकल समानाताहि ॥३४३॥
हमहीं सम्पूर्ण सृष्टिके कर्त्ता हैं हम मालिक दूसर नहीं है हमहीं सबकें
मालिकहैं सबमेरेहीं में समानेहैं हमहीं ब्रह्महैं ऐसा कोई कोई कबीर कायाके
बीरजीव कहै हैं ताको आपै खंडन करै हैं ॥ ३४३ ॥
सुतनहिं मानै बातपिताकी, सेवै पुरुष बिदेह ॥
कहै कबीर अबहुँ किन चेतौ, छांड़ो झूठ सनेह ॥३४४॥
तैं सुतहै रामनाम प्रतिपाद्य जे साहबहैं ते तेरे पिताहैं तिन की बात तैं
नहीं मानै है औ बिदेह पुरुष जो है ब्रह्म ताको सेवै है कहे आपही ब्रह्म ह्वै
बैठै है सो अबहूं चेतकरु साहब कहि आये हैं कि॥ "अजहूं लेहुँ छड़ाय कालसों जो घट