कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६४८ ) बीजक कबीरदास ।
लीन्ह्यो फंटकि पछोरि यह साखी भर सब पोथिनको पाठ मिलि आवा है
औ लोहे चुंबक प्रीति जस यह साखीते चौरासीके वश यह साखी भी उन्तिस
साखी एक पोथीके क्रमते है आवा अब एक पोथीमें अट्ठाइस साखी औरई
और हैं तिनहूंनको अर्थ लिखैं हैं ॥
बूझौ शब्द कहांतै आया, कहां शब्द ठहराय ॥
कह कबीर हम शब्द सनेही, दीन्हा अलख लखाय ३४१
यह शब्द जो रामनाम है सो बूझौ कहे बिचारौ कहांतै आयाहै औ कहा
ठहरायहै सोहम वही शब्दके सनेही हैं वाशब्द तुम नहीं बूझते हौ कैसो है
शब्द कि साहब के इहां ते आयो है ॥ रामनामलै उचरीवाणी ॥ यह रमैनीमें
लिखि आये हैं सो जब कुछ नहीं रह्यो तब रामनामहीतें सबकी उत्पत्ति भई है
सो राम नाम मंत्रार्थ जो मैं बनायो है तामें बिस्तारते लिखि दियो है । इहां संक्षे-
पते जनाये देउँहौं “अ इ उ ण् ऋ ल् क् ए ओ ङ् ऐ औ च् हयवरट् लण् ञ मङण-
नम् झभञ् घढधष् जबगडदश् खफछठथ चटतव् कपय् शषसर् हल् ये ॥ सबबर्ण
चौदह सूत्रमें पाणिनि लिखिदियो॥आदिरन्त्येन सहता। अन्त्येने ता सहित आदि
र्मध्यगानां स्वस्यच संज्ञास्यात्” यहि सूत्र करिकै अकार आदिकालीन औलकार
अंतकालीन तब अल् प्रत्याहारकीन तेहितें बीच के वरण सब आयगये। सो अल्
प्रत्याहार रामनामको एकदेश ते निकसै है सो रामनामके रकारको बर्ण विपर्यय
कियो तब अकारको यह कैतिलै औ रकारको वह कैतिलै गये तब अर् भयो
सो रकार लकारको अभेदहै तेहिते अल्भयो तेहिते राम नामके एक देश ते सब
निकसि आये तेहिते सबको आदि राम नाम है । सो राम नामको अर्थ
साहिबैके ठहरायहै, अर्थात् राम नाम साहबही को बतावै है । सो श्री कबी-
रजी कहै हैं कि, हम वही शब्दके सनेही हैं । कैसो है शब्द कि, अलखहै
वा सबको लखावै है वाको कोई नहीं लखै है जैसे आंखीते सबको देखै औ
आंखी अपनी कोई नहीं देखै है । जो कहो कबीर कैसे कहै हैं कि हम अल-
खको लखायदियो तौ सुनो जैसे ऐना लैके देखै तौ अपनी आंखीको प्रतिबिंब
देखि परै है सो यह बीजकरूप ऐनाहै तामें अनिर्वचनीय जो राम नाम ताको