कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६४२ ) बीजक कबीरदास ।
सो ऐसे संसाररूपी बिटपकी बलिहारी है जामें जरकाटे फलहोइ है अर्थात जौने
जीवको संसार निर्मूल ह्वैगयो तौने जीवको साहब रूपी फल मिलै है ॥३२७॥
सरहर पेड़ अगाध फल, अरु बैठा है पूर ॥
बहुत लाल पचि पाचि मरे, फल मीठा पै दूर ॥३२८॥
या शरीर रूपी सरहर वृक्ष बड़ा ऊँचाहै सरलहूहै सबको मिलै है और
शरीर वृक्षको फल कहा है साहबको जानै सरअगाध है औ सर्वत्र पूर्ण है
अन्तर्यामी रूपते सबके हियेमें बैठाहै सो ऐसो साहबको ज्ञानरूपी फल मीठाहै
परन्तु दूरि है बहुत लाल कहे बहुत जे जीव हैं ते पचिपचि मरे पै पाये नहीं
अथवा साहबको ज्ञानरूपी फल सरहरहै कहे चीकनहै चढ़ने माफिक नहीं है
खसिलि परै है तामे प्रमाण कबीरजी को ॥
बहुतकलोगचढ़े बिनभेदा देखाशिख गहिपानी ।
खसिलां पाउं ऊर्ध्वमुख झूले परेनरककीखानी ॥
औशरीरकोफल साहबको भजनहै तामें प्रमाण गोसांईजीको ।
देहधरेको या फलभाई, भजोराम सबकाम बिहाई ॥ ३२८ ॥
बैठ रहे सो बानियाँ, खड़ा रहे सो ग्वाल ॥
जागत रहे सो पाहरू, तिनहुंन खायो काल॥३२९॥
बनियां बैठ रहे हैं दुकान लगाय ते गुरुवालोगहैं जे जौने देवताको मन्त्र मांगै
हैं ताको तौनहीं मन्त्र देइहैं औ ग्वालखड़े गौवनको चरावैं हैं तेवे हैं जे आत्मैको
मालिक मानै हैं इन्द्रिनको चरावैं हैं जौने विषय चाहै हैं तौने भोगैं हैं दूसरो
लोक नहीं मानै हैं शरीरहीको मानै हैं औ जे जागत रहे हैं ते पाहरू हैं अपनी
बस्तु ताकै हैं ते योगी हैं आपनी इन्द्रीको ताके रहे हैं समाधि लगाये सदा जाग-
तरहैं सोये तीनों साहबको न जान्यो ताते तिनहुंनको काल धरिखायो॥३२९॥
युवा जरा बालापन बीतयो, चौथि अवस्था आई ॥
जस मूसवाको तकै बिलैया, तस यम घात लगाई॥३३०॥
तीनिउं अवस्था बीत गईं चौथि अवस्था आय गई जैसे मूसको बिलारी ताकें
है ताको घात लगायेहै तैसे यम तोको घातलगाये हैं सो अजहूं साहबको चेतु ३३०