कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाखी। (६४१)
सो कबीरजी कहै हैं कि जो जीव साहबको है तौ जौन जौन बस्तु साहबकी ह
तौनतौन बस्तुजीवहूकी है पै अपनेको असफाटा कहे जुदाजुदामानै है कि साह-
बसों मांगै है कि फलानी बस्तु मोको देउ या मूर्ख नहीं समुझै है कि साहबकी
शरणभये कौनौ बातकोटोटो न रहिजायगी सो दरजी जो साहबहै सो कहां तक
सीवै कहे आपने में मिलावै ॥ ३२३ ॥
बनाबनायामानवा, बिनाबुद्धि बेतूल ॥
कहा लाललै कीजिये, बिनाबासका फूल ॥३२४॥
यह मानवा जो है मनुष्य सो बनै बनावा औ बेतूल है कहे कौनौ देवता
याकी बराबरीको नहीं है पै बिना बुद्धिको है याही ते सबते नीच ह्वैरह्यो है
बिनाबासको कहे बिना सुगंधको लाल फूल लैके कहाकरै ऐसे जीव बहुत सुंदर
भयो औ साहबको न जान्यो और मतनमें लगिकै लालह्वैरह्यो वा बुद्धिनहीं
जाते साहबको बूझै तौ कहाभयो तामेंप्रमाण ॥ “कहाभयो जो बड़कूल उपजे
बड़ीबुद्धि है नाहिं ॥ जैसे फूलउजारिके वृथालालझरिजाहिं ॥ ३२४ ॥
साँच बरोबर तप नहीं, झूठ बरोबर पाप ॥
जाकेभीतरसाँचहै, ताके भीतरआप ॥ ३२५ ॥
या साखीको अर्थस्पष्ट है ॥ ३२५ ॥
करत्तैकियानविधिकिया, रविशशिपरीनदृष्टि ॥
तीनलोकमें है नहीं, जानतसकलौसृष्टि ॥ ३२६ ॥
कर्त्ता पुरुष भगवान् नहीं किया न करतार किया न रवि शशि दृष्टि परी-
न तीन लोक में खोजेमिलै परंतु सबसृष्टि जानै है सो कबीरजी कहै हैंकि या
झूठ कहांते आई है ॥ ३२६ ॥
आगे आगे दव बरै, पीछे हरियर होइ ॥
बलिहारी वा वृक्षकी, जर काटे फल होइ॥ ३२७ ॥
कर्त्ता जगत्को बनायो सो कैसो है ताको कहैहैं आगे आगे दव बरै आगे शरीर
सबके जरत जायहै औ पीछे हरियर होयहै कहे नये नये शरीर धारण होत हैं
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