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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 655

साखी । ( ६१७ )
जाकोसतगुरुनामल्यो, ब्याकुलचहुँदिशिधाय ॥
आँखिनसूझैबावरा, घरजारैघूरबुताय ॥ २३९ ॥
गुरुमुख ।
जाको सतगुरु नहीं मिले हैं सो ब्याकुल ह्वैकै चारों ओर धावै है कहूंब्रह्ममें
कहूंनाना ईश्वरनमें नानामतनमेंलागै है कि हमारी मुक्ति ह्वैजाय सो अरे बावरे
तेरी आंखिनमें नहीं सूझै है औरै औरै मतनमें निश्चय करै है सो घूरहै ताकों
कहा बुतावैहै मेरोरूप औ आपनोरूप ताको तौ जानु या घरतो जरोजाय है ताको-
बुताउ जातें जनन मरण छूटै घूर बुताये कहा है ॥ २३९ ॥
अनतवस्तुजोअनतैखोजै, केहिविधिआवैहाथ ॥
ज्ञानीसोईसराहिये, पारिखराखैसाथ ॥ २४० ॥
श्रीकबीरजी कहै हैं कि अनतकी बस्तु अनतै खोजै है कहेयह जीव साहबको
अंशहै सदाको दास है तौनेको कहै हैं कि ब्रह्म को है देवतनको है ईश्वरनकों
दासहै सो जौने साहबको दासहै ताको तो जानबही न कियो आपनो स्वरूप
कौनी रीतिते जानै सो हम तौ सोई ज्ञानीको सराहते हैं जो पारिख अपने साथ
राखै है कि हम साहबके हैं दूसरे के नहीं हैं न ब्रह्मके न मायाके न ईश्वरन के
हैंसोई सांचे ज्ञानीको हम सराहते हैं ॥ २४० ॥
सुनिये सबकी, निबेरिये अपनी ॥
सिन्धुरको सेंदोरा, झपनीकी झपनी ॥ २४१ ॥
जहाँ जहाँ सुनिये तहाँ तहाँ साहबहीकी बात निबेरि लीजिये और मत खण्डन करि
डारिये काहेते कि वेदशास्त्र सोई है जामे साहबको परत्वहोइ जोकहूं वेदशास्त्रक-
रिकै साहबको न जान्यो ताको उपदेश यहि रीतिते जैसे सिंधुर जो हाथी ताको
सेंदुर शृङ्गारिकियो वे शुण्डते धूरिभरियो झपनीकी झपनी कहे जैसे रज झपिगई
तैसे जबलौं उपदेश सुन्यो तबलो ज्ञानरह्यो। फिरि नहींरहै जौने वेद शास्त्रमें साहबको
परत्वहोइ सोई अर्थ । तामें प्रमाण चौरासी अंगकी साखी ॥ "राम नाम निज
जानिले, येही बड़ा अरत्थ॥ काहेको पढ़ि पढ़ि मरै, कोटिन ज्ञान गरत्थ"॥२४१॥