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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

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पृष्ठ 656

( ६१८ ) बीजक कबीरदास ।
बाजनदेवायंतरी, कलिं कुकुरी मति छेर ॥
तुझे बिरानी क्या परी, तू आपनी निबेर ॥ २४२ ॥
जे और और बातें सबकहैं हैं सो या शरीर यंत्रकहे बीणा है जैसों बजवैया
बजावै है तैसो बाजै है ऐसे या शरीरमनके आधीन है जहां चलावैहै तहां चलै है
कहूं बक बक करावै है कहूं ब्रह्ममें लगावै है नानामतनको सिद्धांतकरै है सो
वा यंत्रकों बाजनदे मन बैकळकुकुरिया है वाको विष जो तेरे चढ़ैगो तै
तुहूं बैकळह्वैमरि जाइगो अर्थात् चौरासी योनिमें परैगो सो तोको बिरानी कह
परी है तैं आपनी निबेरु जो तेरे यन्त्र बाजै है सुरति कमलमें गुरु राम
नाम ध्वनि उपदेश देइँ हैं ताको ध्यान करु राम नाम शब्द सब शब्दतें
अलगहै सोई साँचहै और सब मिथ्याहै सो तैं राम नाम ते सनेहकरु राम
नामको स्नेही मरत नहीं है तामें प्रमाण कबीरजीको ॥ “शून्य मरै अजपा मरै
अनहदहू मरि जाय ॥ राम सनेही ना मरै, कह कबीर समुझाय” ॥ २४२॥
गावैं कथैं विचारैं नाहीं, अन जानैको दोहा ॥
कहकबीरपारसपरशेबिन, ज्योंपाहनविचलोहा ॥२४३॥
नाना पुराण नाना शास्त्र नाना मत गावै हैं औ उनको कथनी करै हैं और
औरको समुझावै है परन्तु सर्व शास्त्रको अर्थ साहबही हैं यह नहीं बिचारै हैं
जैसे शुक चित्रकूटी राम कहि दियें न चित्रकूटको अर्थ न रामको अर्थ जानै है
आने में आन साजै है रसाभाव करि देयहै ऐसे सब शास्त्रको सिद्धांत जो जो
साहब पारस रूप तिनको तो जानतही नहीं है कौनी रीति जीव लोहा कञ्चन
होइ अर्थात् जब स्पर्श होय उनको जानि उनमें लगै भजन करै तब कञ्च-
न होय ॥ २४३ ॥
प्रथममैं एक जो हौ किया, भयासो बारह बाट ॥
कसत कसौटी ना टिका, पीतर भया निराट ॥२४४॥
प्रथममें यह जीवको एक कियो कहे एक राहमें लगायो कि मेरी भक्ति करै
गो तौ संसारते छूटि जायगो औ यह बारह बन भयो कहे आपने रूपी बाणकों