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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 654

( ६१६ ) बीजक कबीरदास ।
गुरुमुख ।
साहब कहैं हैं कि अरेकेरा ! अरेजीवौ तैंतो बड़ोकोमल है तब न चेतकियो
जब तेरे समीप बैरलागी अर्थात् गुरुवा लोग उपदेश करनलगे अब तेरे चेते
कहाभयो अबतो उपदेश रूप काँटा तोको घेरिलियो मेरे ज्ञानको फारिडार्यो
अब कहा चेतै है तामै प्रमाण ॥ “आछे दिन पाछे गये कियो न हरिसोंहेत” ॥
अब क्या चेते मूढ़तैं, चिड़िया चुनिगइँ खेत ॥ २३७ ॥
जीव मरण जानै नहीं, अंधभया सब जाय ॥
वादीद्वारेदादिनहिं, जन्मजन्मपँछिताय ॥ २३८ ॥
सों कबीरजी कहै हैं कि साहब या प्रकारते उपदेश करै हैं पै जीवको
कोई मरण नहीं जानै है कि हम मरि जायँगे हमारो जनन मरण न छूटैगो
सो एकतौ आंधरही रहे साहबको ज्ञान नहीं रह्यो तौपै गुरुवनको उपदेश भयो
आँधरते आँधर होत जायँ हैं बादीके द्वारे दादि नहीं पावै अर्थात् जासों पूछै
हैं कि हम कौनके हैं हमारो जनन मरण कैसे छूटै नरकते कौन हमारी रक्षा
करै तौ बेतौ बादी हैं साहबको कैसे बतावैं और और मतमें लगाय दियो
फिरि यादिहू किये साहबको न पायो तातें जगतमें २ पछितायहैं जनन मरण न
छूट्यो गुरुवासाहबको ज्ञान भुलाय दियो तामै प्रमाण ।
बिप्रमतीसीको ।
बिन परशन दरशन बहुतेरे द्वै हैं ब्रह्म ज्ञानी ।
बीज बिना बिज्ञान कथैगो धोखाकी सहिदानी ॥
कृतिम उपासी कर्म्म बिलासी जायँ ते जन यमद्वारं ।
हम करता भजि करता द्वैरहे औरै के उपकारं ॥
राम कहैगा सो निबहैगा उलटि रहै जो गाड़ा ।
धोखा दुंदुर बहुत उठैगा राम भक्तिके आड़ा ।
हिंदू तुरुक दोऊ दल भूले लोक बेद बटपारं ॥
सत गुरु बिना सिद्धि नहिं कोई खिरकी कैन उघारं ॥ २३८ ॥