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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 592

( ५५२ ) बीजक कबीरदास ।
सुखं मया दैत्याश्चहरिणा हताः। तज्ज्योतिर्भेदनेसक्ता रसिका हरिवेदिनः"। औ
साहब के लोकमें जे हैं तिनकी सर्व्वत्र गति है तामें प्रमाण ॥ “सस्मृत्युन्त
रतिससर्व्वेषु लोकेषुकामचारो भवति ”॥ इति श्रुतेः ॥ ६० ॥
दोहरा तो नव तन भया, पदहि न चीन्है कोइ ॥
जिन यह शब्द विवेकिया, छत्र धनी है सोइ ॥ ६१ ॥
सेव्य सेवक भाव मान्यो साहबको जान्यो तब दोहरा नव तन भया कहैं
हंस शरीर पायो, परा भक्ति पायो तौनै पदकहे साहबके लोकमें प्रवेशकरै है
सों वो लोकको नहींचीन्है । जो कहौ ब्रह्मरूप हैकै कैसे सेव्य सेवक भाव
साहबते कियो तुम बनायकै कहौ हौ तौ श्रीकबीरजी कहै हैं जिन यहशब्द
द्विवेकिया कहै जिन साहब यह बिबेककारि शब्द बतायो सोई छत्रधनी है
अर्थात् साहिबै मोको बतायो है मैं बनायकै नहीं कहौं हैं तामें प्रमाण ॥
श्रीक