सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 593, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 593

साखी। ( ५५३ )

अथवा हम जौनचाल बतावैं हैं तौने चाल नहींचलते हो औ हमारो नामलेतेहो
कि, हम कबीरपंथी हैं। सो लम्बी टोपी दीन्हे औ बिना छिद्रको चंदन दिये औ
बहुत साखी शब्द कण्ठ करलिये हमारे फिरका न पावोगे मतको न पावोगे यमके
धक्काते न बचोगे। तामें प्रमाण॥ "हमारा गाया गावैगा। अजगैबी धक्कापावैगा ॥
मेराबूझायबूझैगा। सोतीनलोकमेंसूझैगा" ॥१॥ कबीर की साखी शब्दी पढ़िकै
और बितण्डाबाद अनर्थ करनेलगे औ परमपुरुष श्रीरामचन्द्रको वेदशास्त्रको झूठक-
रनलगे आपने जीवै को सत्य करनलगे ते यमको धक्का पावैचाहैं । औजे कबीरकी
साखी बूझिकै औ परमपुरुष श्रीरामचंद्रको अंशहै जीव श्रीरामचंद्र याके रक्षकहैं
ऐसो जे बूझ्यो ते तीनलोकमें सूझबई करेंगे काहेते उनके रक्षक परमपुरुष
श्रीरामचंद्र तो बनेई हैं सर्वत्र रक्षा करिलेईहैं ॥ ६२ ॥
सबते सांचा है भला, जो सांचा दिल होइ ॥
सांच बिना सुख नाहिं ना, कोटि करै जो कोइ ॥६३॥
जो आपना साँचादिलहोइ तो सबते साँचे जेपरमपुरुष श्रीरामचंद्र औउन्हींको
अंशजीवहै औ उन्हींको मैं साँचो दासहौं यह मत सबते साँचहै सोईभलाहै। सो
यह साँच मत बिना सुख काहूको नहीं है कोटिन उपायकरै । औ श्रीरामचंद्र
सत्यहैं औजीव सत्यहै औ जीवको औ श्रीरामचंद्रको भेदसत्यहै तामेंप्रमाण ॥
"सत्यंभिदः सत्यंभिदः" ॥ इत्यादि औ श्रीकबीरजीकी साखिहूको प्रमाण ॥
"सत्य सत्य समरथ धनी सत्य करो परकाश । सत्यलोक पहुँचावहू, छूटै
भवकी आश ॥ ६३ ॥
साँचा सौदा कीजिये, अपने मनमें जानि ॥
साँचे हीरा पाइये, झूठे मूरौ हानि ॥ ६४ ॥
आपने मनमें पारिखकै लीजिये तब साँचा सौदा कीजिये कहे ऐसी खानि
खुदाइये जाते साँचे हीरा पाइये वही में कच्चे हीरा निकसैं हैं तिनको छाड़िदी-
जिये । ऐसे वेदपुराण खानिहैं तिनमें साहबको मत निकासि लीजिये यह साँचों
सौदा कीजिये और मतनको त्यागि दीजिये काहेते झूठे मत मैं लागे आपनों
स्वरूप जो है साहब को अंश मूर ताकी हानिह्वैजायहै अर्थात् भुलिजायहै॥६४॥