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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 561

ॐ
अथ बिरहुली ।
आदि अंत नहिं होत बिरहुली ।
नहिं जड़ पल्लव पेड़ बिरहुली ॥ १ ॥
निशिवासर नहिं होत बिरहुली । पानी पवन न होत बिरहुली २
ब्रह्म आदि सनकादि बिरहुली । कथि गये योग अपार बिरहुली ३
मास असाढ़हि शीत बिरहुली । बोइन सातौ बीज बिरहुली ४
नित गोड़ै नित सिंचै बिरहुली । नित नव पल्लव पेड़ बिरहुली ५
छिछिल बिरहुली छिछिल बिरहुली। छिछिल रही तिहुँलोक बिरहुली
फूल एक भल फुलल बिरहुली । फूलि रहल संसार बिरहुली ७
ते फुल बंदै भक्त बिरहुली । वांधि कै राउर जाहि बिरहुली ॥ ८ ॥
ते फुल लेहीं संत बिरहुली । डसिगो वेतल सांप बिरहुली ॥ ९ ॥
विषहर मंत्र न मान बिरहुली । गाडुरि बोले आर बिरहुली १०
विष की क्यारी बोयो बिरहुली। लोरत का पछिताय बिरहुली ११
जन्म जन्म अवतरे बिरहुली। फल यक कनयल डार बिरहुली १२
कह कबीर सचु पाय बिरहुली। जो फल चाखहु मोर बिरहुली १३
आदि अंत नहिं होत बिरहुली । नहिं जड़ पल्लव पेड़ बिरहुली १
निशिवासर नहिं होत बिरहुली । पानी पवन न होत बिरहुली २
ब्रह्म आदि सनकादि बिरहुली। कथि गये योग अपार बिरहुली ३