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कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 512

( ४६६ ) बीजक कबीरदास ।
औ ठांवहिं ठांव बझाऊ कहे मोहरूप शिकारी सो नाना बिषय की कथा
औ नाना भूत यक्षादिक सेवनते सिद्धिकी प्राप्त तिनकी कथा औ नाना ता
मसमत तिनकी कथा सो शब्दरूप बागुरि ठामहि ठांव लगाय राख्यो है
तामें श्रवणरूप कहार अरुझिकै डोला डारि देइहें फिरि संसार मग कैसो
है ज्यों ज्यों संसार पथमें चलियतहै त्यों त्यों दूरि रामपुर परतो जायहै
भैया रामपुरकी गैल नहीं है और राहहै फिरि कैसो ह यामें वास नहीं
है अर्थात् कल नहीं रहै है कर्म करतई जाइहै शांत हैकै कोई नहीं टिक्यो ॥
“मारग अगम संग नहिं संबल नाम ग्रामकर भूलारे । तुलसिदास भव त्रास हरहु
अब होहु राम अनुकूलारे ॥” सो या प्रकार यह मार्ग है संसार सोई पृथ्वी है
तामें विषयके हेतु नाना यतन करिबो अरु राजस तामस शास्त्रमार्ग तदनुसार
कर्म करिबो सोई चलिबो है ताको गोसांईजी कहै हैं किं अगमहै कहे चलिबे
मुआफ़िक नहीं है औ नाम मार्गमें संतनको संगहै ते रामपुरको बिघ्न नाशिकै
पहुंचाइ देइहैं यहां कैसो है संगनहिं संबल कहे सम्यक् है बल जेहिके ऐसे
संत सङ्गमें नहीं है अथवा नानामार्ग में तो सात्विक श्रद्धा कलेवा मिलै है या
मार्गमें श्रद्धारूप कलेवा नहीं मिलैहै सो गोसांईजी अपनी रामायण में लिख्यो
है जे श्रद्धा संबल रहित इत्यादिक औ जा गाउंको तुमको जानोहै ताको नामही
भूलि गयो है भुला जो कह्यो सो गर्भमें सुधि होइ है फिरि भूलि जायहै याते
भूला कह्यो है अथवा जीव नाम ग्राम कर भूलाहै नाना देवतन को नाम लेइहै
औ तिनहीं के धाम जाइबेकी इच्छा करै है सो तेरो ते नामनते भव बन्धना छूटै
है न ते धामनमें गये तेरो जनन मरण त्रास छूटैगो सो अब गोसांईजी कहैंहैं कि
हे भैया ! अब अपने अपने जीवन पै दाया करि संसारकी त्रास हरो अब काहेते
कह्यो कि अनेक जन्म भटकि के अनेक शरीर पाइकै मनुष्यको शरीर पायो है
सो अबहूं नाम मार्ग चलौ याते अब कह्यो है औ होहु राम अनुकुला जो कह्यो
सो उपक्रममें नाम मार्ग बतायो ताको चलिकै उपसंहार में होहु राम अनुकूला
कह्यो सो एक उपलक्षण है छः प्रकारकी शरणागती को सूचन कियो है उपक्रम
में नाम मार्ग बतायो उपसंहारमें शरणागती बतायी सोई श्री गोसांई जी कहैहैं