कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकहरा। (४६६.)
कहे कुटिल कलंकी करम करिकै कहे बनाइकै हम सबको दीन्हो है औ ऐसो
निबल डोलाहै। औ मंद मोलबिन जो कह्यो सो औरको मांस भोजनहूंमें काम
आवै है यह मानुष शरीरको मांस बेचबेहूते कोऊ नहीं लेइ याते मंद मोल
कहे थोरहू मोल बिनाहै सो ऐसो डोला में चढ़िकै हे भैया ! या संसार मार्ग में
चलौगे तो कलंकी करम को दियोहै डोला तुम्हूं को कलंक लागि जाइगो।
यह जर्जर डोला जो संसार मार्गमें टूटैगो तौ फँसि जाउगे फिर न निकसौगे
जो नाम सड़क चलौगे तौ या सड़क राम घाटही लगीहै डोला टूट्यो दिव्य रूप
ते आंखी मूंदेहू चले जाउगे अथवा दिव्य रूपते विमान चढ़ि चले जाउगे कैसो
है डोला सो कहैंहैं ॥ "बिषम कहार मार मद माते चलहिं न पाय बटोरे रे ।
मंद बिलंद अभेरा दलकनि पाई दुख झक झोरेरे" ॥ बिषम कहे कहार जेहिको
पांचों इंद्रिय सो एकतो सम नहीं है दूसरे स्वभावहीते बिषमहैं तीसरे मार मदमाते हैं
सो मतवारे के पांय सम नहीं परै हैं चलत में पांय बगरि जाइ हैं पांय बगरिबे
कहे रूप रस गंध स्पर्श शब्द इनमें जाय रहैहै। फिरि मार्ग कैसो है मंद कहे
नीचहै बिलंद कहे ऊंचहै अर्थात् कहूं अपमानते दीन ह्वै जाइहै अपनेको नीच
मानै है कहूं मानते अपनेको बड़ो ऊंच मानैहै औ कहूं अभेरा कहे धक्का लगि-
जायहै। धक्का कहा है कहूं पुत्र मरिगयो भाई मरिगयो चोर चोराय लियो सो या
लोकमें लोग कहैंहैं कि हमको बड़ो धक्का लगो। दलकनि कहाहै कि विषय सुख देत
में अच्छो लगैहै जब वामेंरस्यो तब बिषय दलदल में फँसि जाय है औ पाई
दुःख झकझोरे कहे डोलामें झकझोरा लगैहै सो इंद्रीरूप कहार गिरैं हैं कहूं
उठै हैं ताते विकलताई झकझोरा का दुःख पाइतहैं ॥ "कांट कुरायल पेटन
लोटन ठांवहिं ठांव बझाउरे । जस जस चलिय दूरि निज तस तस बासन
भेटल काउरे" ॥ कहीं कांटहैं कहे सुन्दर रूपहै सो नयनरूपी कहारनके
छेदिजायहैं तब गिरि जाय हैं कहे आसक्त ह्वै जाय हैं औ कुराय सजल होइ
है सो रस है तामें रसनारूप कहार बूडिजाय है औ लपेटन फूली लताहै तेई
गन्धहैं तामें नासिकारूप कहार लपटिकै गिरि परै है लोटन लोकमें सर्पको
कहैंहैं सो स्पर्श है त्वचारूप कहारनको डसि डारै है कामिनीके एक अङ्ग
छुवतमें सर्वांग कामबिष चढ़ि जाय है याते स्पर्शको लोटन सर्प कह्यो है
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