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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 513

कहरा । ( ४६७ )
कि हे भैया ! रघुनाथजी को नाम जपौ औ शरण जाउ याहीमें उबरहै औरमें
नहीं है षट् बिधि शरणागत को लक्षण ॥ “ अनुकूलस्य सङ्कल्पः प्रतिकूलस्य
वर्जनम् ॥ रक्षिष्यतीति विश्वासो गोप्तृत्ववरणं तथा ॥ आत्मनिक्षेपकार्पण्यं
षड्विधा शरणागतिः ” ॥ ४ ॥
इति पांचवां कहरा समाप्त ।
अथ छठवां कहरा ॥ ६ ॥
राम नाम बिनु राम नाम बिनु मिथ्या जन्म गँवाईहो॥१॥
सेमर सेइ सुवा जो जहड़े ऊनपरे पछिताई हो ।
जैसे मदिप गांठि अर्थै दै घरहुकी अकिल गँवाई हो ॥२॥
स्वादे उदर भरत धौं कैसे ओसे प्यास न जाई हो ।
द्रव्यक हीन कौन पुरुषारथ मनहीं माहँ तवाईहो ॥ ३ ॥
गांठी रतन मर्म नहिं जानेहु पारख लीन्ही छोरी हो ।
कह कबीर यह अवसर बीते रतनन मिलै बहोरी हो ॥४॥
राम नाम बिनु राम नाम बिनु मिथ्या जन्म गँवाई हो ॥१॥
उपासक जे हैं ते पंचांगोपासना करिकै औ कापालिकादिक मतवारे देवत-
नके उपासना करिके नास्तिक मरबई मोक्ष मानिकै व्याकरणी शब्द ज्ञान
करिकै ज्योतिषी कालज्ञान करिकै सांख्यवाले प्रकृतिपुरुषज्ञान करिकै पूर्व
मीमांसावारे कर्मही करिकै नैयायिक दुःखध्वंसही करिकै औ कणाद वाले नौगु-
णध्वंसही करिकै औ शंकरवेदांतवाले ब्रह्मज्ञानही करिकै इत्यादिक मुक्त होब
मानै हैं परम पुरुष पर श्री रामचन्द्र तिनहीं बिना औ तिनके रामनाम बिना मिथ्य
जन्म गँवाइ दियो ॥ १ ॥
सेमर सेइ सुवा जो जहड़े ऊनपरे पछिताई हो ।
जैसे मदिप गांठि अर्थैदै घरहुकी अकिल गँवाई हो ॥ २ ॥