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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 498

( ४५२ ) बीजक कबीरदास ।
यकतो अनिष्ट पांय परि विनवै विनती किये न मानै हो ।
अनचिन्ह रहे कियो न चिन्हारी सो कैसे पहिचानै हो ७
एक जे साहब हैं सबके रक्षक तिनते ये अनिष्ट रहे कहे उनको इष्ट न
मानत रहे । औ वहां यमदूतनसों पांय परि परि विनवै है, सब देवननते विनवै
हैं, वे बिनतीहू किये नहीं मानैहैं । काहेते कि, दयाहीन हैं । औ साहब जें
दयालु छुड़ावनवारे तिनसों अन चिन्हार रहे चिन्हारी न कियो सो कैसे अब
पहिचानै । भाव यह है कि जो, अजहूं स्मरणकरो तौ साहब छुड़ाइही
लेइगो ॥ ७ ॥
लेइ बुलाय बात नहिं पूछै केवट गर्भ तन बोलै हो ।
जेकरी गांठि सबल कछु नाहीं निराधार है डोलै हो८
औ केवट जे गुरुवा लोगहैं ते तब तो गर्भ कहे अहंकार तनमें कैकै तुमको
बोलाय अपने मतमें मिलाय लीन्हेनि । अब जब यमदूत मारन लगे तब
तुमको बात नहीं पूछै हैं । गुरुवा लोग सो जाके सबल कहे खर्च राम नाम
रह्यो सो पार भयो औ जाके राम नाम सबल कछु नहीं रह्यो सो निराधार
कहे रक्षक रहित यमपुरमें डोलैहै अथवा निराधार जो ब्रह्म ताहीम डोलैहै॥८॥
जिन सम युक्ति अगमनकै राखिन घरणि मांझ घर डेहरिहो।
जेकरे हाथ पाउँ कछु नाहीं धरन लागु तन सेहरि हो ॥ ९ ॥
जौने स्त्री पुत्रादिकन को नाना युक्तिकैकै पालन कियोहै तौन घरणि कहे स्त्री
शरीर छूटे डेहरी भरि जायहै आगे नहीं जायहै । सम जो पाठहोय तौ जिनका
अपने सम बनाय राखिन तौन स्त्री डेहरीलौं पहुंचाई है । धुनिते या आयो कि
पुत्र चिता लौं जायहै सो जेकरे हाथ पाउँ कछु नाहीं कहे जेकरे हाथपाउँ नहीं
है ऐसो जो जीवात्मा ताको जब यमदूत धरनलागु तब तनमें सेहरि है आवै है
तन विकल है जाइहै, वे कोऊ नहीं सहाय करैं हैं । ताते साहबको जानौ जो
कहो यमदूतै कैसे धरेंगे ? तौ लिंग शरीरते धरेंगे अर्थात् जाको जैसो कर्म है
बाके संस्कारते वा लोकमें कर्म शरीर बनैहै ॥ ९ ॥