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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 444, कुल 766 में से

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पृष्ठ 444

( ३९६ ) बीजक कबीरदास ।
मकाहै तहां अल्लाहको बास है ताही ओर मुसल्मान निमाज़ गुजौरै हैं। सो यातें
काह भयौ ? आपने दिलमें खोज कैकै तौ देखबै न कियों कि, करीम जे
खुदा राम जे रामचंद्र ते दिलहीमें हैं हिंदू तुरुक दोउनमें वोई हैं ये तो शरीर
आय साहब एकई है या न जानै तौ काहभयो ॥ ५ ॥ मुसल्मान लोग या
मानै हैं खोदाय मसजिद में बसतु है औ हिन्दू मानै हैं कि रामचन्द्र मूर्त्ति औ
तीर्थ में बसै हैं यातें काह भयो ? काहेते दुइ में या बात कोई न बिचारै कि,
और मुल्कमैं को बसै है सो सर्वत्र साहिबही पूर्ण है यहै न जानने ते सब आपने
आपने पक्षमें लगे हैं ॥ ६ ॥
वेद किताब कीन्ह किन झूठा झूठा जो न विचारै ।
सब घट एक एक करि लेखै भय दूजा करि मारै ॥ ७ ॥
वेद वाले किताबको झूठाकहै हैं, किताब वाले वेदको झूठाकहैं हैं सो या
कहा झूठाहै इनको को झूठा करिसकै है । झूठा वही है जो इनको नहीं बिचारै
है कि, वेदकिताबको यही सिद्धांत है साहब सर्वत्रपूर्ण है हिंदूके याहै कि, सब-
नाम साहिबहीके हैं ॥ “ सर्वाणि ना मानि यमाविंशतीति श्रुतिः ” ॥ औमुस-
ल्मानके “ जामैजमीसिफ़ात जामै जमीअसमात ” यह कलामुल्लाके किताबमें
लिखै है सो घट घटमें चित्त स्वरूप जीव एकही है सबके साहब रामचन्द्रही
हैं; तिनको एक करि लेखै भय दूसरेते होय है ताकों मारै सो यातो बिचारबै
न कियो तौ काह भयो ॥ ७ ॥
जेते औरत मर्द उपाने सो सब रूप तुम्हारा ।
कबिर पोंगड़ा अलह रामको सो गुरु पीर हमारा ॥ ८ ॥
सो कबीरजी कहै हैं कि, जेते औरत औ मर्द उपाने कहे उपजे हैं ते सब
तुम्हारे रूप हैं काहेते कि, चित् जो तुम्हारो विग्रहहै ताही ते जगत् है । औ
कबिर कहे कायाके बीर जे जीवहैं ते हे अल्लाह राम तिहारे जीवनके पोंगड़ा
हैं अर्थात् तुम्हीं घट घट में बोलत हौ, तुमको जानिबेको इनके कुदरति
नहीं है चाहौ तुम उपदेशकरि आपनेमें लगावो चाहौ गुरुपीर द्वारा उपदेश