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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 445

शब्द । ( ३९७ )
करि आपनेमें लगावो इनको वश नहीं है तामें प्रमाण ॥ “यथादारुमयी-
योषिन्नृत्यते कुहकेच्छया। एवमीश्वरतंत्रोयमीहते सुखदुःखयोः” ॥ चौपाई ॥
“उमा दारुयोषितकी नाईं । सबैनचावत रामगोसाईं” ॥ ८ ॥
इति सत्तानवे शब्द समाप्त ।
अथ अट्ठानबे शब्द ॥ ९८ ॥
आवो वे आवो मुझे हरिको नाम। औरसकल तजुकौनेकाम १
कहँ तब आदम कहँ तब हवा । कहँ तब पीर पैगम्बर हुवा २ ॥
कहँ तब जिमींकहां असमाना।कहँ तब वेद किताब कुराना ३
जिन दुनियामें रची मसीद । झूठो रोजा झूठ ईद ॥ ४ ॥
सांच एक अल्लाःको नामा।ताको नय नय करौ सलाम ॥५॥
कहौधौं भिश्त कहांते आई।किसके कहे तुम छुरी चला ई६॥
करता किरतिम बाजी लाई । हिंदु तुरुक दुइ राह चलाई ७॥
कहँ तबदिवस कहां तब राती।कहँ तबकिरतिम कीउतपाती ८
नहिंवाकेजातिनहींवाकेपांती।कहकबीरवाकेदिवसनराती ९
आवो वे आवो मुझे हरिको नाम।औरसकल तजु कौनेकाम १
कहँ तब आदम कहँ तब हवा । कहँ तब पीर पैगम्बर हुवा २॥
कहँ तब जिमी कहाँ असमाना।कहँ तब वेदकिताब कुराना ३
श्रीकबीरजी कहैहैं कि, जौने नाममें सब नामहैं तौने जो मन बचनके
परे हरिको नाम है सो हे जीव ताको तैं बिचारकरु कि, मोको आवै ।
और सब बस्तु झूठे छोड़िदे, कौने कामके हैं । जब वह नाम रह्योहै आदिमें
तब कुछ नहीं रह्यो ॥ १ ॥ ॥ २ ॥ ३ ॥ पदका अर्थ स्पष्ट है भाव यह है
कि, ये जे कहिआये ते कहां रहेहैं अर्थात् कोई नहीं रहे ॥ २ ॥ ३ ॥