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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 412, कुल 766 में से

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पृष्ठ 412

( ३६४ ) बीजक कबीरदास ।
जो जीव जयदेव सो कातै है अर्थात् अहंब्रह्म बुद्धि जब समष्टि जीव कियोहै
तबहीं मनकी उत्पत्ति भई कर्म भयो है संसार प्रकट भयो है ॥ २ ॥
तीन लोक ताना तनो ब्रह्मा विष्णु महेश ।
नाम लेत मुनि हारिया सुरपति सकल नरेश ॥ ३ ॥
तीनलोक जोहै सोई ताना तन्यो है ताको तीनि खूंटाहैं रजोगुण ब्रह्मा
मृत्युलोक के सतोगुण विष्णु आकाशके तमोगुण महेश पातालके। अरु अनेक जे
नामहैं अनेक जे मतहैं अनेक जे ज्ञान हैं वेदमें सोई कपरा तयारभयो तिनको
नाम लेत मुनि औ इंद्र औ सबराजा हारिगये। वही ब्रह्मरूपी कपराके गठियामें
कसे रहिगये वासों निकसिकै मुक्ति न पावत भये अर्थात् मोको न जानत भये ॥३॥
बिन जिह्वा गुण गाइया बिन वस्ती का गेह ॥
सूने घर का पाहुना तासों लावै नेह ॥ ४ ॥
कहत का भये कि बिन जिह्वा जो गुण गावै है कहे अजपा जो है सोहं
तौने अजपाको साथ गाइकै कहे जपि जपिकै बिन बस्तीको गेह जो है ब्रह्म
झूठा तौने कपराके गठिया के भीतर बँधि जातभये कहे यह मानत भये कि
हमहीं ब्रह्महैं । सो वह घरतो देशकाल बस्तु परिच्छेदते शून्य है सो जैसे सूनें
घरमें पाहुना जाय औ कुछ न पावै तैसे जीव उहां कुछ न पावतभयो
येतौ रामनामको जगतमुख अर्थ करि सब यह कपरा बिनो अरु श्रीकबीरजी
साहबमुख अर्थकरि कौन कपरा बिनै हैं सो कहे हैं ॥ ४ ॥
चारि वेद केंडा कियो निराकार किय रास ।
बिनै कबीरा चूनरी पहिरैं हरिके दास ॥ ५ ॥
चारिवेद को केंडा करिकै औ निरङ्कारको राशि बनाइकै वही निरङ्कारके
भीतरते निकासि लैजाइकै । अर्थात् प्रकाशरूप ब्रह्म कौनको प्रकाशै ? तब यह
बिचारेउ साहबके लोकको प्रकाशहै । लोक कौनको है । यही बिचार करिबो है
ब्रह्मते वेदको तात्पर्य निकसिबो है सो चारिउ वेदको केंडा करिकै ब्रह्म जो है
राशि तौनेते वेदको तात्पर्य निकासि रामनामकी चूनरी श्रीकबीरजी कहैं कि