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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 333

शब्द । ( २८३ )
योगी कहै योग है नीको द्वितीया और न भाई ।
चुंडित मुंडित मौन जटा धरि तिनहुं कहां सिधि पाई २॥
ज्ञानी गुणी शूर कवि दाता ये जो कहहिं बड़ हमहीं ।
जहँसे उपजे तहँहिं समाने छूटिगये सब तबहीं ॥ ३ ॥
जिनको जिनको यह पदमें कहि आये तेते आपने मतको सिद्धांत करतभये
कि, हमारही मत सिद्धांतहैं । परन्तु रक्षकके विनाजाने जहां ते उपजे तहँ
पुनि समाइ जानभये । अर्थात् जा गर्भते आये तौनेही गर्भमें पुनि गये, जन-
नमरण नहीं छूटै है । जब दूसरा अवतार लियो तब जौने जौने मतमें आगे
सिद्धांत करिराख्यो तेने मन सब छूटिगये । अथवा जहांते उपजे कहे जौने
लोक प्रकाशते उपजे हैं तहँ समाने महाप्रलयमें तब सब बिसरिगयो ॥ ३ ॥
वायें दहिने तजो विकारै निजुकै हरि पद गहिया ।
कह कबीर गूंगे गुरखाया पूंछेसों का कहिया ॥ ४ ॥
सो मंत्र शास्त्रमें जे वाममार्ग दक्षिण मार्ग हैं ते दोऊ विकारई हैं तिनको
दुहुनको छोड़िदेउ औ हरिजे परमपुरुष श्रीरामचन्द्र हैं तिहारे रक्षा करनबारे
तिनके पदको निजुकै कहे आपन मानिकै गहौ अथवा निजुकै कहे बिशेषिकै
तिनके पदको गहौ । जो कहो उनको बताइदेउ वे कैसे हैं तौ वे तौ मन बचनके
परे हैं उनको कोई कैसे बताइसकै । जो उनको जान्यो है ताको गूंगे कैसो
गुर भयो है कछू कहि नहिं सकै है इशाराहिते बतावै है । वेदशास्त्रको तात्पर्य
कै जो सज्जनलोग साहबको समुझावै हैं सोतात्पर्य वृत्तिही करिकै बतावै हैं ऐसे
तुमहूं जो भजन करोगे तौ तुमहूँ उनको जानि लेउगे कि ऐसे हैं ॥ ४ ॥
इति अड़तीसवां शब्द समाप्त ।
अथ उनतालीसवां शब्द ॥ ३९ ॥
ऐसे हरिसों जगत लरतूहै । पंडुर कतहूं गरुड़ धरतुहै॥१॥
मूस बिलारी कैसे हेतू । जम्बुककर केहरिसों खेतू ॥ २ ॥