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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 334

(२८४) बीजक कबीरदास ।
अचरज यक देखा संसारा।सोनहा खेद कुंजर असवाग ॥३॥
कह कबीर सुनो संतो भाई। यह संधि कोइ विरलै पाई ॥४॥
ऐसे हरिसों जगत लरतुहै । पंडुर कतहुं गरुड़ धरतुहै ॥१॥
जैसे पूर्व कहिआये ऐसे रक्षक हरिसों जगत् लरतुहै कहे विरोध करतुहै ?
औ जे उनके भक्त उनको बतावै हैं तिनके मतको खंडन करै है। सो हे मूढ !
पंडुरकहे पनिहां पियरसर्प कहूं गरुड़को धरतुहै ? जो “डुंडुभ” पाठहोय तौ
डुंडुभ पनिहां सर्पका नामहै । सो रामोपासना गरुड़ है सो और मत जे सर्प
हैं तिनको कहां खंडनकीन होइहै वही सबको खंडन करनवारो है । जो वाकों
(रामोपासना को) मत अच्छी तरहते जानो होइ है ॥ १ ॥
मूस बिलारी कैसे हेतू । जंबुक कर केहरि सों खेतू ॥ २ ॥
सो हे जीवो ! तुम्हारो ज्ञानतौ मूस है औ गुरुवालोगन को ज्ञान बिलारीहै।
जे और और मतमें लगावै हैं तुमको और और मतमें लगाइकै खाइलेइंगे
तिनसों तुमसों कैसे हेतुभयो । जंबुक जो सियार सो केहरि जो सिंह है तासो
खेत करै है कहे लरैहै । सो जंबुक अज्ञान है सो सिंहजो तुम्हारो जीव सो लरैहै
वह सिंह जीव कैसो है अज्ञान को नाश कै देनवारोहै अर्थात् जब आत्माकों
ज्ञान होइ है तब अज्ञान नाश ह्वै जाइहै ॥ २ ॥
अचरज यक देखा संसारा। सोनहा खेद कुंजर असवारा॥३॥
कह कबीर सुनो संतो भाई। यह संधि कोई बिरले पाई ॥४॥
सो हम यह बड़ा आश्चर्य देख्योहै । सोनहा जो कूकुर सो कुंजर के अस-
वारको खेदै है । सो नानामतवारे जे हैं तेई कुत्ते हैं ते काउं काउं कहैं
शास्त्रार्थ करिकै कुंजरके असवार जे हैं रामोपासनाके साधक तिनको खेदैहैं ।
कहे उनसों वे कछुनहीं पावैहैं । यहां कुंजर मन है ताको परम पुरुष श्रीराम-
चन्द्र लगाइदियेहैं औ आप असवार हैं ॥ ३ ॥ सो श्रीकबीरजी कहै हैं कि,