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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 312

( २६२ ) बीजक कबीरदास ।
भाई अद्भुत रूप अनूप कथा है कहौं तोको पतिआई ।
जहँजहँ देखों तहँ तहँ सोई सबघट रह्यो समाई ॥ १ ॥
जाति करिकै सबजीव एकही हैं तातेजीवनको भाई कह्यो कि, हे भाई
जीवो ! वे जे हैं परमपुरुष श्रीरामचन्द्र तिनको अद्भुतरूपहै, अरु वहि रूपकी
अनूपकथाहै सो मैं जो वाको दृष्टांत दैके समुझाऊं हौं कि, बाको रंग दूर्बा दलकी
नाईं है, अरसी कुसुमकी नाईं, नील कमलकी नाईं, तौ येई सबमें भेदपरै एक
एककी तरह नहीं है वहतो मनबचनकें परे है । ऐसेनाम रूप लीला धाम सबहै
वाको तौ कैसे समुझाऊं। काहेते जोमैं वाको समुझाइकें कहौं तौ कैसे कहो औ जों
कहबऊकरौं तौ कोई पतिआय कैसे । सो यहितरहको जो याको रूपहै सो जहां
जहां देखोहौं तहां तहां वहै रूप देखायहै । काहेते कि, सबघटमें समाय रह्यो
है । यहां सबघटमें समान्यों जोकह्यो ताते चितहू अचितहू में समाइरह्यो यह-
आयो जो व्यंग्य पदार्थहै जीव ब्रह्म माया काल कर्म स्वभाव ताहीको सब देखैहैं
औ जो व्यापक पदार्थ है ताको कोई नहीं देखैहै । जो चितहू अचितमें जो
कहो वही धोखा ब्रह्मको तुमहूं कहतेहौ जो सर्वत्र फैलि रह्यो है तौ वाको कोई-
नहीं कहतेंहैं; काहेते किं, अद्वैतबादी कहै हैं कि, सब पदार्थ वही ब्रह्मही है
वातें भिन्न दूसरो पदार्थ नहींहै औ हम कहैहैं कि, सबपदार्थ चित् अचित्
रूपते व्याप्य है औ हमारो साहब सर्वत्र व्यापक है सो जाको बिश्वास होइ
ताको वे साहब साकेत निवासी परम पुरुष श्रीरामचन्द्र सहजही प्रकट ह्वै
जायैं । सो जो मैं कहौंहौं ताको नहीं प्रतीत करै हैं। चित् जो है जीव औ ब्रह्म
ताहूमें श्रीरामचन्द्र व्यापक हैं तामेंप्रमाण ॥ “औंयोवैश्रीरामचन्द्रोभगवान्
द्वैतपरमानन्दात्मा यः परंब्रह्मेतिरामतापिन्याम्” ॥ जीवहूमें व्यापकहैं तामें
प्रमाण ॥ “यआत्मनितिष्ठन् यआत्मानं वेद्यस्यात्माशरीरमिति” ॥ मायादिक
सबमें व्यापक हैं तामेंप्रमाण ॥ “यस्यभासासर्वमिदंविभातीतिश्रुतिः” ॥ १ ॥
लछि बिनु सुख दरिद्र बिनु दुख है नींद विना सुख सोवै ।
जस बिनु ज्योति रूप बिन आशिक रतन विहूना रोवै॥२॥