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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 217, कुल 766 में से

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पृष्ठ 217

भिमानहै तबलग शीतउष्णहैआत्माको नहीं लगैहै साहब कहैंहैं । कि वह जोहैं
आत्मामेरी घराणि कहे स्त्री अर्थात् जीवरूपा मेरीशक्ति सो मैं जो हौं याकों
खसमताको नहीं चीन्हहै त्यहिते बौरीकहे बौरायगई ॥ ३ ॥ साँझ सकार
दियालैबारैहै कहे समाधिलगायकै ज्योति को बारिकै कुंडलिनी उठाइ आत्माकों
लैजाइकैकै वही ज्योतिमें मिलाये है औ याको मैं खसमहौं सो मोको छोड़िकै
लगवार जोहै धोखा ब्रह्म ताको सुमरै है ॥ ४ ॥
वाहिकेसँगमेंनिशिंदिनराँची । पियसोंवातकहै नहिंसाँची ५
सोवतछांड़िचली पियअपना । ईदुखअवधौंकहवक्याहिसना
सुरतिरुपी नारीजो है दूती ताहीके साथद्वैकै वहीधोखा ब्रह्म में निशिदिन
रचिरही है कहे प्रीतिकरिरही है पियजोमैं हौं तासों सांचीबात नहींकहैहै सांची
बात कहाहै कि मैं तिहारोहौं यहनो कहै तौ मैं जीवरूपा शक्तिको छोड़ाइलेउँ
साहबकी यह प्रतिज्ञा है जो मोको जानै मोकोगोहरावै तौमेंसंसारते छुड़ाइलेउँ तामें
प्रमाण॥ "अबहूंलेउँ छुड़ाय काल ते जोवटसुरति सम्होरै" ॥५॥ सो जीवरू-
पाशक्ति मोको न जान्यो मोको न गोहरायो सोवत रहि गई जागत न भई
सोवतमें मोकोछोड़ि स्वप्न देखनवाली संसारीद्वैगई अर्थात् मोहरूपी निद्रा जब
प्राप्तभई तब संसार में परि कै नाना दुःखपावैहै सो यहदुःख अपनो कासों
कहै सांच जो मैं ताको तौ जानै नहीं है अरु और सब स्वप्नते झूठे हैं ॥६॥
साखी ॥ अपनीजाँघउघारिकै, अपनी कही न जाइ ॥
कीजानै चितआपना, कीमेरो जन गाइ ॥ ७ ॥
साहब कहै हैं कि यहिभांति मेरी जीवरूपाशक्ति मोकोछोड़ि कै संसारीद्वै
गई सो अपनीजंघा जो उघारिहोइ तौ कोई कहां अपनोगिल्ला करै है नहीं
करैहै ऐसे मेरी शक्ति यह जीव सो जो और और लगवार जोहैं सो यह दुःख
का मोसों कहिजाइहै नहीं कहिजाइहै कि तो मेरो दिल जानैहै याको उद्धार द्वै
जाइ याही चाहौंहौं औ कि मेरेजन जेहैं ते मेरो सौशील्य दया बात्सल्यादिक
गुणगान करिकै जानै हैं कि साहबमें निर्दोष सौशील्यादिक गुणहैं जीवको उद्धार