कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी । ( ७३ )
कहे हरि अमकट भये तिनके बिना जाने जगत्के धन्धेमें जीव सब अपनो
मन लगायराख्यो ॥ २ ॥
गहनी बंधन बांधनसूझा । थाकिपरेतबकछूनबूझा ॥ ३ ॥
गहनी बंधन जो मायासबलित ब्रह्म जौन बांधिकै संसारमें डारि देनवारों
ऐसो जो ब्रह्म ताको बांधजीवनको न सूझिपरचो कौन बांध कि जो कोई
मोहीमेंलगैहै तौमैं बांधिकै संसारमें डारिदेउँ हैं या मायासबलित ब्रह्मको
बांध न सूझि परचो जों कहो काहेते बांधबांध्यो है तो जगत्की उत्पत्ति वही
ब्रह्मते होय है वा ब्रह्म जगत्को रहिबोई चहैहै याही ते जो कोई वामें लगै है
ताको साहबको ज्ञान भुलायकै संसारहीमें राखैहै सो कबीरजी कहैं हैं कि
जब वही संसार में थकिपरे तब कछु न बूझत भये अर्थात् अनेक मतनकों
बिचारैहै पै सिद्धांत न पावतभये साहबको ज्ञान भूलिगये ॥ ३ ॥
भूलिपरे तब अधिक डेराइ ।