जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished110 पृष्ठ
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६४' जगजीवन साहब की बानी
कोउ कासी कोउ जात द्वारकै, हित कर तीरथ न्हाहिं ।
कोउ ब्रत दान अचार करै बहु, कोऊ तपस्यहिं जाहिं ॥ २ ॥
तूरत बाहैं धींच गगन मुख१, उलटी धूम घुटाहिं२ ।
पीवत दूध दूब फल बन के, कंद मूरि खनि३ खाहिं ॥ ३ ॥
कोउ रहैं ठाढे कोउ रहैं बैठै, कोउ होइ जोगी जोग कराहिं ।
कोउ जागै निसि दिन नहिं सोवैं, कोउ दम साध रहाहिं ॥ ४ ॥
जज्ञ राग रस निर्त रंग कबि, ज्ञानी ज्ञान कथाहिं ।
पंडित कथा पुरान बखानहिं, पढ़तै जन्म सिराहिं४ ॥ ५ ॥
माला मुद्रा भस्म लगावहिं, चंदन तिलक कराहिं ।
सलिग्राम औ पीतर पुतरी, पूजि पूजि हरषाहिं ॥ ६ ॥
एह सब करै सरै न भजन बिन, मन थिर होवै नाहिं ।
परहिं आय भौजाल फेरि फिरि, समुझि समुझि पछिताहिं ॥ ७ ॥