जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८ जगजीवन साहिब की बानी
तीरथ ब्रत और दान तपस्या,
नाहीं एकौ माना।
सब बिसराइ मनहि नहिं आवत,
ध्यान धरै निर्बाना ॥ २ ॥
निरखत निर्मल जोति सदा वै,
तज दिये पानि१ पखाना२।
तस आचार बिचार हैं उनके,
काहू गति नहिं जाना ॥ ३ ॥
सतगुरु पासहिं बास किहे हहिं,
नाहीं और तेवाना३।
जगजीवन गुरु चरनन लागे,
आपुहिं करै निभाना४ ॥ ४ ॥
॥ शब्द ७ ॥
साधौ बिन किरपा भक्ति न होय।
रात दिन जो करै बंदगी, कबूल परै नहिं सोय ॥ १ ॥
जज्ञ जान उदान५ बास करै, कंदमूरि भखि सोय।
बरत रहै अस्नान तीरथ, भक्ति तबहुँ न होय ॥ २ ॥
पढ़ै चारौ बेद बिद्या, ज्ञान कबिता होय।
मौन ह्वै कै लाय तारी, भक्ति तबहुँ न होय ॥ ३ ॥
काया कासी जाय कल्पै, डारि सर्बस खोय।
द्वारिका भुज लेय छापा, भक्ति तबहुँ न होय ॥ ४ ॥
मुड़ाइ मूड़ औ पहिरि माला, भ्रमत फिरै सब कोय।
धीच६ तूरै करि तपस्या, भक्ति तबहुँ न होय ॥ ५ ॥
(१) पानी। (२) पत्थर। (३) फ़िक्र।' (४) निबाह। (५) पाँच मुख्य पवन
में से शरीर की स्थिति है यह हैं-प्रान, अपान, व्यान, उदान, समान। (६) प्राणायाम