जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished110 पृष्ठ
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गुरु और शब्द महिमां । ६६
जिन नहिं जाना सो पछिताये,
रहे मनहिं मन रोई ।
काह भयो नर की काया धरि,
वृथा जन्म गा खोई ॥ २ ॥
जागे भागि पागि रस माते,
पल छिन नाहिं बिछोई ।
जगजीवन भवसागर तरिगे,
मूरति रहे समोई ॥ ३ ॥
॥ शब्द ५ ॥
मन जग जन्मि कै भजि लेहु ।
चूकि ना यह पाय औसर,
फिरि दोष ना केहु देहु ॥ १ ॥
धाम दौलत बहुत दुनियाँ,
किहिन जानि सनेहु ।
गयो निज पछिताय कै,
सब झूठ सुत हितु गेहु ॥ २ ॥
आइ जे जे जगत महँ,
यहि भयो ते ते खेहु ।
नाम बिनु कछु काम का नहिं,
ज्यौं गल्यो कागद मेंहु१ ॥ ३ ॥
करहु मन परतीत अपने,
चित्त चरनन देहु ।
जगजिवन दुख सुख दूर होइहि,
अमर जुग जुग होहु ॥ ४ ॥
(१) बरसात ।