जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगुरु और शब्द महिमा। ६७
सेमर पर बैठा सुवना,
लाल फर देख भुलाना हो।
मारत टोंट भुआ उधिराना,
फिरि पाछे पछिताना हो॥ ४॥
गूलर कै तू भुनगा,
तू का आय समाना हो।
जगजीवन दास बिचारि कहत,
सब को वहँ जाना हो॥ ५॥
गुरु और शब्द महिमा
॥ शब्द १ ॥
अब जग हमहिं सिखवत आनि।
करत हैं चतुराइ बहु बिध, अहैं पाप की खानि॥ १ ॥
कहूँ सिखि सुनि लिहिनि बातें, कहत अहैं बखानि।
आप का कछु चेत नाहीं, भजन की है हानि॥ २ ॥
करत नहिं अंदेस भूले, अहहिं ते अभिमानि।
अन्तहूँ पछिताइ हैं, फिर डूबिहैं बिन पानि॥ ३ ॥
भजहु नाम गुनाह मेटहि, सरन आपनि आनि।
जगजिवन दास बचाउ इहि, गुरु सब्द कहि परमानि॥ ४ ॥
॥ शब्द २ ॥
जे जन नाम भजि बलवान।
ताहि केवल कोइ नाहीं, कौन मारै मान॥ १ ॥
रहत निरखत पलक छिन छिन, नाम बहु निर्बान।
चाखि पीवै जिवै जुग जुग, काल देखि डेरान॥ २ ॥
कहत कथा प्रगास करि कै, जुगन जुग का ज्ञान।
उतरि गा सो पार कामन, जानि मानि प्रमान॥ ३ ॥