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सर्वकोश
जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 52

चेतावनी ४६
॥ शब्द ४२ ॥
साधो मन मन रहहु बिचार ।
निरखत रहहु परखि छबि देखत,
दृढ़ करि सुरति सँवार ॥ १ ॥
सीतल ह्वै रहु धरु सँभारि पग,
तमा१ तुजुक२ तैं मार ।
पाँच बचाइ चलाइ लाइ रहु,
आपन चहसि सँभार ॥ २ ॥
मैं तैं ई तौ अहं मद गलती३ ,
एइ सब करत बिगार ।
तेहिं गरुवाई बोझ ते दाबे,
नाहीं होत सवार ॥ ३ ॥
कुमति प्रसंग पचीस एक सब,
जानि सर्बसौ वार ।
जगजीवन सब लै न्यारे रहु,
चरन औ रूप निहार ॥ ४ ॥
॥ शब्द ४३ ॥
ए मन त्यागि देहु गुमान ।
वहाँ ते करि कौल आयहु, नाहिं समुझत ज्ञान ॥ १ ॥
छिया बिदु का पहिरि जामा, हितं भयो हैवान ।
सुद्धि सोइ बिसारि दीन्हेव, कर्म आइ समान ॥ २ ॥
भूलु नहिं तकि देखु सुख परि, अचल नहिं अस्थान ।
जाइगा चल रहहि ना कोइ, बाल बूढ़ जवान ॥ ३ ॥
सिद्ध साधं जती जोगी, करहिं एऊ पयान ।
अमर ते मरि जाइंगे, चलि जाहिंगे ससि भान ॥ ४ ॥
( १ ) लालच । ( २ ) शान । ( ३ ) फंद, जाल ।
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