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सर्वकोश
जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 36

चेतावनी ३३
जो आवा सो खाकहिं मिलिगा, उड़ि उड़ि खेह उड़ान ।
बृथा गयो आय जग जनमें, जो पै नाहीं जान ॥ ३ ॥
सुद्धि सँभारि सँवारि लेहु करि, अधरम करहु अड़ान ।
जगजीवन गुरु चरन गहे रहु, निरगुन तकु निरबान ॥ ४ ॥
॥ शब्द ६ ॥
मैं तैं जग त्यागि मन चलिय सिर नाई ।
नाम जानि दीन हीन करिये दीनताई ॥ १ ॥
अहंकार गर्ब ते सब गये हैं बिलाई ।
रावन के सीस काटि राम की दोहाई ॥ २ ॥
जिन जिन गुमान कीन मारि गर्दही मिलाई ।
साधि साधि बाँधि प्रीति ताहि पर सहाई ॥ ३ ॥
परसहु गुरु सीस डारि दुनिया बिसराई ।
जगजीवन आस एक टेक रहिये लगाई ॥ ४ ॥
॥ शब्द ७ ॥
अरे मन देहु सबै बिसराय ।
दीन ह्वै लवलीन करि कै नाम रहु लौ लाय ॥ १ ॥
नाम अमृत जपहु रसना गुप्त अंतर पाय ।
मैल छूटि कै होय निर्मल सुद्धि पाछिल आय ॥ २ ॥
निर्गुनं निहारि निरखहु अनत नाहीं जाय ।
सीस दुइ कर परहु चरनन छूटि नाहीं जाय ॥ ३ ॥
सदा रहहु सचेत हेत लगाइ नहिं बिसराय ।
जगजीवन परकास मूरति सूरति सुरति मिलाय ॥ ४ ॥
॥ शब्द ८ ॥
हमारा देखि करै नहिं कोई ।
जो कोइ देखि हमारा करिहै, अंत फजीहति होई ॥ १ ॥
५