जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबिनती और प्रार्थना २६
अब बिस्वास आस है तुम्हरी,
तकौँ चरित कहि जात न कोई ।
जगजीवन का आपन जानहु,
सूरति राखौ छबिहिं समोई ॥ ४ ॥
॥ शब्द ६० ॥
काह कहौं कहि आवत नाहीं,
मन तन तुम पर वारी ॥ टेक ॥
देखत अहौं दूसरो नाहीं, एकै जोति तुम्हारी ।
केहु भरमाय देत माया महँ, केहु करत हितकारी ॥ १ ॥
देखत आहौं खेलत सब महँ, को करि सकै बिचारी ।
करता हरता तुमहीं आहौ, अजब बनी फुलवारी ॥ २ ॥
दासन दासा मोहिं जानिये, जानत अहौ हमारी ।
जगजीवन दास सोस दियो चरनन, कबहुँ नाहिं बिसारी ॥ ३ ॥
॥ शब्द ६१ ॥
आरति करौं सुनो मेरे प्यारे,
तुम गुनाह के मेटनहारे ॥ टेक ॥
बुद्धि हीन कछु गति नहिं जानौँ,
कृपा करहु तब नाम बखानौँ ॥ १ ॥
सेस महेस ब्रह्म धर ध्याना,
वेहू नहिं करि सकैं बखाना ॥ २ ॥
अंत न खोज अगाध को गावै,
जोहि जस वह तस ध्यान लगावै ॥ ३ ॥
जगजीवन के बस कछु नाहीं,
दाया चरन बसहि मन माहीं ॥ ४ ॥