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सर्वकोश
जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 20

बिनती और प्रार्थना । १७
बाल-ज्ञान प्रभु अहै हमारा, झूठ साँच बहुतेरी ।
सो औगुन गुन का कहौं तुम तें, भौसागर तें निबेरी ॥ २ ॥
भव तें भागि आयौं तुव सरनै, कहत अहौं अस टेरी ।
जगजीवन की बिनती सुनिये, राखौ पत जन केरी ॥ ३ ॥
॥ शब्द ३२ ॥
अब तुम होहु दयाल तुम्हारी पैयाँ परौं ॥टेक॥
सूझत नहिं मैं भ्रमत फिरत हौं,
पर्यों मोह के जाल ॥ १ ॥
नाम तुम्हार सुमिरि नहिं आवै,
जग संगति जंजाल ॥ २ ॥
आवत जब सुधि वहै समय की,
ब्याकुल होहुँ बेहाल ॥ ३ ॥
हाथ पाँव मेरे बल नाहीं है,
तुमहिं करहु प्रतिपाल ॥ ४ ॥
जगजीवन कौ दरसन दीजै,
अब मोहिं करहु निहाल ॥ ५ ॥
॥ शब्द ३३ ॥
बार बार कहि बिनय सुनावौं ।
तुम्हरी कृपा तें सुरति लगावौं ॥ १ ॥
अनत न जाउँ जाउँ बलिहारी ।
सूरति कबहुँ रहै न न्यारी ॥ २ ॥
जब तुम चहहु रहौं तब पासा ।
कृपा करहु तब बसि बिस्वासा ॥ ३ ॥
दास केर बस एकौ नाहीं ।
तुम जानौ जानै मन माहीं ॥ ४ ॥
३