जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished110 पृष्ठ
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बिनती और प्रार्थना ।
ऊँचे चढ़त आनि कै रोकत,
मानहिं नहीं दोहाई ॥ ४ ॥
अब करु दाया जानि आपना,
बिनय कै कहौं सुनाई ।
जगजीवन कै इतनी बिनती,
तुम सब लेहु बनाई ॥ ५ ॥
॥ शब्द २५ ॥
साईं मैं तो बड़ा अनारी ।
कुमति प्रसंग बास नर्कहिं मा,
आवत नाहिं बिचारी ॥ १ ॥
पर्यों अपरबल महा मोह महँ,
सुधि वह नाहि सँभारी ।
गुन नाहीं औगुन सब बहु बिधि,
बिसरी सुरति हमारी ॥ २ ॥
केतौ करि उपाय मैं थाक्यों,
मैं मन मान्यों हारी ।
अब दाया करि चरन लाई कै,
निकट ते कबहुँ न टारी ॥ ३ ॥
देहु सिखाइ पढ़ाइ ज्ञान मोहिं,
करहु योग अधिकारी ।
जगजीवन को चरन तुम्हारे,
सूरति रहौं निहारी ॥ ४ ॥
॥ शब्द २६ ॥
साईं कुदरति अजब तुम्हारो ।
तुम हहु अजब अजब हैं बन्दे,
मैं तुम्हरी बलिहारी ॥ १ ॥