सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 110 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 15

२ जगजीवन साहब की बानी
सत की सेज बिछाय सूति रहि,
सुख आनन्द घनेरा ।
करता हरता तुमहीं आहहु,
करौं मैं कौन निहोरा ॥ २ ॥
रह्यौँ अजान अब जानि पर्यो है,
जब चितयो एक कोरा ।
अब निर्बाह किये बनि आइहि,
लाय प्रीति नहि तोरिय डोरा ॥ ३ ॥
आवा गमन निवारहु साईं,
आदि अंत का आहिउ चोरा ।
जगजीवन बिनती करि माँगै,
देखत दरस सदा रहौं तोरा ॥ ४ ॥
॥ शब्द २४ ॥
साँई मोहिं ते सुमिर न जाई ।
पाँच अपरबल जोर अहैं एइ,
इन ते कछु न बिसाई ॥ १ ॥
निसि बासर कल देहि नहीं एइ,
मोहिं औरै राह लगाई ।
जो मैं चहौं गहौं तुव चरना,
इन छिन छिन भरमाई ॥ २ ॥
साथ स