जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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२ जगजीवन साहब की बानी
सत की सेज बिछाय सूति रहि,
सुख आनन्द घनेरा ।
करता हरता तुमहीं आहहु,
करौं मैं कौन निहोरा ॥ २ ॥
रह्यौँ अजान अब जानि पर्यो है,
जब चितयो एक कोरा ।
अब निर्बाह किये बनि आइहि,
लाय प्रीति नहि तोरिय डोरा ॥ ३ ॥
आवा गमन निवारहु साईं,
आदि अंत का आहिउ चोरा ।
जगजीवन बिनती करि माँगै,
देखत दरस सदा रहौं तोरा ॥ ४ ॥
॥ शब्द २४ ॥
साँई मोहिं ते सुमिर न जाई ।
पाँच अपरबल जोर अहैं एइ,
इन ते कछु न बिसाई ॥ १ ॥
निसि बासर कल देहि नहीं एइ,
मोहिं औरै राह लगाई ।
जो मैं चहौं गहौं तुव चरना,
इन छिन छिन भरमाई ॥ २ ॥
साथ स