जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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॥ शब्द ३८ ॥
नाम मंत्र सम नाहीं कोय ।
प्रगट पुकारि कहत हौं सोय ॥ १ ॥
अंतर डोरी राखहु लाय ।
सोवत जागत बिसरि न जाय ॥ २ ॥
बोलहु नाहिं बहुत बतलाहु ।
अंतर भजि ले याहै लाहु१ ॥ ३ ॥
जो पै कोटिउ तिरथ अन्हाय ।
मन का मैल तबहुँ नहिं जाय ॥ ४ ॥
करै तपस्या तन काँ जारी ।
नाम बिना गै सबै बिगारी ॥ ५ ॥
दूध पियहि तस मूरिहि खाय ।
भावै घर माँ खाय अघाय ॥ ६ ॥
जगजीवन बिस्वास बस राम ।
तेहि कौ सुफल सिद्ध भा काम ॥ ७ ॥
॥ शब्द ३६ ॥
राम क भजन करहु मन माहीं ।
जीवन जन्म सुफल जग माहीं ॥ १ ॥
भूलहु नाम न तब सुख पाय ।
राम मंत्र सुमिरहु मन लाय ॥ २ ॥
बिनु सुमिरन गति मुक्ति न होय ।
सब्द सत्य कहि भाखत सोय ॥ ३ ॥
सुमिरत ब्रह्मा सुमिरत सेस ।
सुमिरत गौरी और गनेस ॥ ४ ॥
(१) लाभ ।