जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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कर्म भर्म निषेध । १०१
एहि कठिन नदी है धारा ।
तुम अब कि उतारहु पारा ॥ ४ ॥
जगजीवन दास तुम्हारा ।
मैं सीस चरन पर वारा ॥ ५ ॥
॥ शब्द ३७ ॥
साधौ का कहि सब्द सुनावै ।
सब्द है साँच माँच१ कहि भाषै,
काहु के मन नहिं आवै ॥ १ ॥
जग सब अंध कुमारग डोलहि,
चेत हेत नहिं लावै ।
हिय कठोर पाषान अहै बहु,
नाहीं सब्द समावै ॥ २ ॥
भेख अलेख२ बहुत है दुनियाँ,
करि कै स्वाँग दिखावै ।
आसा झूठ लाय सब बाँधा,
नाहिं निरंतर गावै ॥ ३ ॥
कोई तीरथ बरत तपस्या,
जहाँ तहाँ कहँ धावै ।
जल पषान की आहै पूजा,
भ्रमि भ्रमि जन्म गँवावै ॥ ४ ॥
अजपा जपत रहै बिन जिभ्या,
कबहूँ नाहिं बिसरावै ।
जगजीवन पहुँचा चौथे पद,
गुरु कहँ सीस नवावै ॥ ५ ॥
(१) सच मुच । (२) बेहिसाब ।