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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 97

[Header] ब्रह्म बेदी ८६

कच्छ मच्छं कुरम धोलं सेस सहस-फन गावहीं ।
नारद मुनि से रटैं निस दिन ब्रह्म पार न पावहीं ॥३२॥
संभु जोग बिजोग साधा अचल अडिग समाध है ।
अवगत की गत नाहिं जानी लीला अगम अगाध है ॥३३॥
सनकादिक औ सिध चौरासी ध्यान धरत हैं तासुका ।
चौबीसो अवतार जपत हैं हरमहंस प्रकास का ॥३४॥
सहस अठासी औ तैंतीसो सूरज चंद चिराग है ।
धर१ अंबर२ धरनीधर३ रटते अवगत अचल बिहाग है॥३५॥
सुर नर मुनिजन सिध अरु साधक पारब्रह्म कूँ रटत हैं ।
घर घर मंगलचार चौरी ज्ञान जोग जहँ बटत हैं ॥३६॥
चित्रगुप्त धरमराय गावै आदि माया ओंकार है ।
कोट सरसुती लाप करत हैं ऐसा ब्रह्म दरबार है ॥३७॥
कामधेनु कलपबृच्छ जाके इन्द्र अनंत सुर भरत है ।
पारबती कर जोर लछमी सावित्री सोभा करत है ॥३८॥
गंधर्ब ज्ञानी अरु मुनि ध्यानी पाँचो तत्त खवास है ।
त्रिगुन तीन बहुरंग बाजी कोइ जन बिरले दास है ॥३६॥
ध्रू प्रहलाद अगाध स्वर्ग है जनक बिदेही जोर है ।
चले बिमान निदान४ बीता धमराय की बँध तोर है ॥४०॥
गोरखदत्त जुगादि जोगी नाम जलंधर लीजिये ।
भरथरी गोपीचन्द सीझे ऐसी दिच्छा दीजिये ॥४१॥
सुलतानी बाजीद फरीदा पीपा परचे पाइया ।
देवल फेरा गोप गुसाँई नामा५ की छान छवाइया ॥४२॥
छान छवाई गऊ जिवाई गनिका चढ़ी बिवान में ।
सदना६ बकरे कूँ मत मारै पहुँचे आन निदान में ॥४३॥


(१) धरती । (२) आकाश । (३) शेषनाग । (४) आदि कर्म्म । (५) देखो नोट
पृष्ठ ७० । (६) देखो नोट पृष्ठ २१-२२ ।