गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८८ गरीबदास जी की बानी
दिल अंदर दीदार दरसन बाहर अंत न जाइये ।
काया माया कहा बापुरी१ तन मन सीस चढ़ाइये ॥२०॥
अवगत आदि जुगादि जोगी सत पुरुष लौलीन है ।
गगन मँडल गलतान गैबी जाति अजाति बेदैन है ॥२१॥
सुख सागर रतनागर निरभय बिन मुख बानी गावही ।
बिन आकार अजोख निरमल दृष्टिमुष्टि न आवही ॥२२॥
झिलमिल नूर जहूर जोती कोट पदम उजार है ।
उलट नैन बेसुन्न बिस्तर जहाँ तहाँ दीदार है ॥२३॥
अष्ट कमलदल सकल रमता त्रिकुटी कमल मध निरखहीं ।
सेत धजा सुन्न गुमठ२ आगे पचरँग झंडे फरकहीं ॥२४॥
सुन्न मंडल सतलोक चलिये नौ दर मूँद बेसुन्न है ।
बिन चसमों एक बिम्ब३ देखा बिन सरवन सुनि धुन्न है॥२५॥
चरन कमल में हंस रहते बहुरंगी बरियाम है ।
सूछम मूरत स्याम सूरत अचल अभंगी राम है ॥२६॥
नौ मुखंध४ निसंक खेलो दसवें दर मुख५ मूल६ है ।
मालिन रूप अनूप सजनी बिन बेली का फूल है ॥२७॥
स्वास उस्वास पवन कूँ पलटै नागफली कूँ भूच७ है ।
सुरत निरत का बाँध बेड़ा गगन मँडल कूँ कूँच है ॥२८॥
सुनले जोग बिजोग हंसा सब्द महल कूँ सिध करो ।
गहु गुरुज्ञान बिज्ञान बानी जीवतही जग में मरो ॥२६॥
उजल हिरंबर सेत भौंरा अछै बृछ सत बाग है ।
जीते काल बिसाल सोहं तरजीजन बैराग है ॥३०॥
मनसा नारी कर पनिहारी खाकी८ मन जहँ मालिया ।
कुंभक काया बाग लगाया फूले फूल बिसालिया ॥३१॥
(१) बेचारी । (२) गुम्बज़ । (३) प्रकाशमान गोलाकार । (४) द्वारे । (५) मुख्य ।
(६) सार वस्तु । (७) भौंचना । (८) पिंडी ।