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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 28

२० गरीबदास जी की बानी
पारवती के उर धरा अमर भई छिन माँहँ ।
सुक की चौरासी मिटी निरालंब निज नाम१ ॥२४॥
अगम अनाहद भूमि है जहाँ नाम का दीप ।
एक पलक बिछुरै नहीं रहता नैनों बीच ॥२५॥
साहब साहब क्या करै साहब है परतीत ।
भैंस सींग साहब भया पाँड़े गावैं गीत२ ॥२६॥
राम सरीखा राम है संत सरीखे संत ।
नाम सरीखा नाम है नहीं आदि नहि अंत ॥२७॥
मांहमा सुन निज नाम की गहे द्रोपदी चीर ।
दुस्सासन से पचि रहे अंत न पाया बीर३ ॥२८॥
सेत बँधा पाहन तिरे४ गज पकड़े थे ग्राह५ ।
गनिका चढ़ी बिमान में६ निरगुन नाम मल्लाह ॥२६॥
(१) देखो नोट साखी नंबर २-४ “साध महिमा का अंग” [आगे] ।
(२) एक पाँड़े किसी महात्मा के पास उपदेश लेने गये । महात्मा ने पूछा तुम किसको
सब से अधिक प्यार करते हो । पाँड़े बोले एक भैंस को जिसे हमने पाला है । महात्मा ने
कहा कि उसी का ध्यान किया करो । पाँड़ेजी गुरु के कथन अनुसार अपनी भैंस के
ध्यान में लीन हो गये । यहाँ तक कि उनको ध्यान में भैंस नजर आने लगी । एक दिन
महात्मा ने उनको ध्यान के समय बुलाया, पाँड़े आँख मूँदे हुए बोले कि महाराज मैं घोंची
भैंस की सींग में फँस गया हूँ किस तरह बाहर निकलूँ । महात्मा ने ऐसी दृढ़ता ध्यान
की देख कर दया से पाँड़े से भैंस का ध्यान छुड़ा कर मालिक के ध्यान में लगा दिया
जिससे मालिक का मेला हो गया ।
(३) युधिष्ठिर पांडव, कौरवों के साथ जुआ खेलने में अपनी स्त्री द्रोपदी को हार गये
तब दुस्सासन नामी कौरव ने द्रोपदी को सभा में नंगी करने के लिये उसकी साड़ी खींची ।
ऐसे गाढ़ के अवसर पर द्रोपदी ने दीन होकर अपने इष्ट श्रीकृष्ण का स्मरण किया जिनके
प्रताप से साड़ी इतनी बढ़ती गई कि दुस्सासन खींचते खींचते हार गया पर उसका
अंत न पाया ।
(४) लङ्का और हिंदुस्तान के बीच में समुद्र पर पुल बाँधने के लिये बन्दर लोग राम
नाम लिख कर समुद्र में पत्थर फेंकते थे जो नाम के प्रभाव से तैरते थे और इस तरह
पुल तैयार होगया ।
(५) किसी नदी में एक हाथी को जो नहाने उतरा था मगर पकड़ कर खींचे लिये जाता
था, हाथी ने भगवान को टेरा तब उन्होंने प्रगट होकर उसको उबारा ।
(६) एक बेश्या को मरते समय जमदूत सता रहे थे कि एक साधू आ गये । बेश्या ने