सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 27, कुल 186 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 27

सुमिरन का अंग १६
दुहूँ दीन मध ऐब है अलह अलख पहिचान।
नाम निरंतर लीजिये भगत हेत उत्पान ॥१२॥
अष्ट कमल दल राम है बाहर भीतर राम।
पिंड हाड़ में राम है सकल ठौर सब ठाम ॥१३॥
सकल बियापी सुरत में मन पवना गहि राख।
रोम रोम धुन होत है सतगुरु बोले साख ॥१४॥
मूल कमल में राम है स्वाद चक्र में राम।
नाभि कमल में राम है हृदय कमल बिस्राम ॥१५॥
कंठ कमल में राम है त्रिकुटि कमल में राम।
सहस कमल दल राम है सुन बस्ती सब ठाम ॥१६॥
अचल अभंगी राम है गलताना दम लीन१।
सुरत निरत के अंतरै बाजे अनहद बीन ॥१७॥
राम कहा तो क्या हुआ उर में नहीं यकीन।
चोर मुसै घर लूटहीं पाँच पचीसो तीन ॥१८॥
राम कहंते राम है जिन के दिल हैं एक।
बाहर भीतर रमि रहा पूरन ब्रह्म अलेख ॥१६॥
राम नाम निज सार है मूल मंत्र मन माहिं।
पिंड ब्रह्मांड से रहित है जननी जाया नाहिं ॥२०॥
राम रटत नहिं ढील कर हर दम नाम उचार।
अमी महा रस पीजिये बहुतक बारंबार ॥२१॥
कोट गऊ जे दान दे कोट जज्ञ जेवनार।
कोट कूप तीरथ खनै२ मिटै नहीं जम मार ॥२२॥
कोटिन तीरथ व्रत करै कोटिन गज कर दान।
कोटि अस्व बिप्रों दिये मिटै न खैंचा तान ॥२३॥
(१) महव। (२) खोदें।