दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary
महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा
DevanagariHindipublished156 पृष्ठ
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श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ [ ३०
है और 'विच्चे' का अर्थ समर्पण या नमस्कार है; अर्थात् ज्ञान
की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती तथा सम्पूर्ण संकल्पों की
अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी और सम्पूर्ण कर्मों की स्वामिनी महाकाली
स्वरूप में सच्चिदानन्द रूप ही हैं। उनके इस अभिन्नरूप को
नमस्कार है; नमस्कार का अर्थ समर्पण है; व्याकरण में सम्प्रदान
चतुर्थी का यही अर्थ है। इसी से नमः के योग में चतुर्थी होती
है आप ये भी जान चुके हैं कि ये तीनों बीज परमात्मा के
वाचक हैं। सभी आकृतियाँ सत् तत्व में (काली रूप) सभी
प्रतीतियाँ चित् तत्व में (महालक्ष्मी) सभी प्रीतियाँ आनन्द तत्व
(महा सरस्वती) में ही विवर्त हैं।